राजनीति

दोस्ती, रिश्ते, राजनीति और मार्गदर्शन…

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दोस्ती, रिश्ते, राजनीति और मार्गदर्शन…

एक पुरानी घटना याद आ रही है। बात 2001 की है। मैं उस समय हरदा नया-नया पढ़ने आया था। ग्वालनगर में एक चुनावी सभा हो रही थी।

मंच पर तत्कालीन अध्यक्ष प्रत्याशी सुरेंद्र जैन, पार्षद प्रत्याशी—जहाँ तक मुझे याद है मीराबाई, तत्कालीन विधायक कमल पटेल और तत्कालीन सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष विजय कुमार खंडेलवाल ‘मुन्नी भैया’ मौजूद थे। सभा के दौरान एक पत्रकार ने मुनि भैया से सवाल किया—

“अब आपकी उम्र हो गई है, स्वास्थ्य भी पहले जैसा नहीं रहा, तो आपका उत्तराधिकारी कौन होगा? क्या आपका बेटा राजनीति में आएगा और आपकी राजनीतिक विरासत संभालेगा?” मुन्नी भैया का अंदाज़ ही अलग था। बात छोटी होती थी, लेकिन असर बहुत बड़ा। उन्होंने कहा— “मेरा बेटा तो राजनीति में सक्रिय है और काफी लंबे समय से सक्रिय है।

कई चुनाव भी जीत चुका है।” पत्रकार ने दोबारा पूछा— “कौन? कहाँ?” तब खंडेलवाल जी ने सामने खड़े कमल पटेल की ओर इशारा करते हुए कहा— “ये कमल… ये मेरा बेटा है।” कमल पटेल तत्काल आगे बढ़े, मुनि भैया के पैर छुए और उनके पास खड़े हो गए। उस दिन मुन्नी भैया ने सार्वजनिक रूप से जो कहा, वह सिर्फ एक वाक्य नहीं था।

वह एक रिश्ते, एक विश्वास और एक राजनीतिक मार्गदर्शन की घोषणा थी। या यू कहे अपनी राजनीतिक विरासत सोप दी l आज जब हेमंत खंडेलवाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और कमल पटेल के राजनीतिक सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उस 2001 की सभा का वह प्रसंग और भी महत्वपूर्ण लगता है। मैं उस समय का प्रत्यक्षदर्शी हूँ।

इसलिए यह बात किसी राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर नहीं, बल्कि एक पुरानी याद और उस दौर के रिश्तों की कहानी के तौर पर साझा कर रहा हूँ। रिश्ते सिर्फ खून से नहीं बनते… कुछ रिश्ते विचारों से बनते हैं, कुछ विश्वास से और कुछ वर्षों के साथ निभाए गए मार्गदर्शन से। इस रिश्ते की उम्र और गहराई का अंदाज़ा आप खुद लगाइए…

मैंने तो सिर्फ 2001 की एक याद आपके सामने रखी है।

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।