ड्रग रैकेट सरगना का वारंट जारी कराएगी पुलिस:प्रयागराज में 6 दिन बाद भी पकड़ से दूर, स्टोर की थीं 3 करोड़ की नशीली दवाएं
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →प्रयागराज के कल्याणी देवी में तीन करोड़ रुपये की नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में मुख्य आरोपी अरुणी सहगल अब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन कई कोशिशों के बाद भी उसका पता नहीं चल सका है। ऐसे में अब पुलिस उसके खिलाफ वारंट जारी कराने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।
गिरफ्तारी नहीं होने पर पुलिस जल्द ही कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सकती है। अतरसुइया पुलिस ने कल्याणी देवी के गुजराती मोहल्ले में 22 सितंबर को एक मकान के कमरे में छापा मारकर करीब तीन करोड़ रुपये की नशीली दवाएं बरामद की थीं। पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी अरुणी सहगल मौके से फरार हो गया था।
इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। कई दबिशों के बाद भी नहीं मिला आरोपी पुलिस ने आरोपी की तलाश में उसके संभावित ठिकानों के साथ उसके संपर्कों की भी जानकारी जुटाई है। इसके बावजूद अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। लगातार फरार रहने के कारण अब पुलिस कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अगर आरोपी जल्द गिरफ्तार नहीं होता है तो उसके खिलाफ कोर्ट में वारंट जारी करने के लिए अर्जी दी जा सकती है। इसके जरिए उसकी गिरफ्तारी के लिए कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। कमरे से मिली थी तीन करोड़ की खेप पुलिस ने जिस कमरे में छापा मारा था, वहां 11,037 शीशी कोडीनयुक्त कफ सिरप, 11,825 इंजेक्शन, 35,520 कैप्सूल और 1,61,400 टैबलेट बरामद की गई थीं।
बरामद दवाओं में ब्यूप्रेनोर्फिन और पेंटाजोसिन के इंजेक्शन समेत अन्य दवाएं शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं का अवैध भंडारण किया गया था। कमरे को कथित तौर पर गोदाम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। बैच नंबर मिटाने का भी मिला सामान छापेमारी के दौरान पुलिस को मिनी ग्राइंडर और उसके टूल्स भी मिले थे।
पुलिस के मुताबिक इनका इस्तेमाल दवाओं के बैच नंबर मिटाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा कमरे से जीके इंटरप्राइजेज की बैंक चेकबुक, बैंक स्टेटमेंट, पैन कार्ड और आधार कार्ड की छायाप्रतियां भी मिली थीं। इन दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस दवाओं की खरीद और सप्लाई से जुड़े लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
12 महीने से चार हजार रुपये में लिया था कमरा पुलिस के मुताबिक अरुणी सहगल करीब 12 महीने से इस कमरे में रह रहा था। उसने 75 वर्षीय मकान मालिक प्रकाश चंद्र टंडन से कमरा चार हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर लिया था। मकान मालिक ने कमरा किराये पर देते समय कोई रेंट एग्रीमेंट नहीं कराया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी इतने लंबे समय से कमरे का इस्तेमाल किस तरह कर रहा था और इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं वहां कब पहुंचाई गईं।
पुराने मुकदमों की भी जांच पुलिस के अनुसार अरुणी सहगल के खिलाफ पहले भी शंकरगढ़ थाने में एनडीपीएस एक्ट और मध्य प्रदेश ड्रग कंट्रोल एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हैं। इन पुराने मामलों की जानकारी भी मौजूदा जांच से जोड़ी जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पुराने मामलों में सामने आए लोगों या नेटवर्क का इस बरामदगी से कोई संबंध है या नहीं।
गिरफ्तारी से खुलेगा सप्लाई नेटवर्क फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी को गिरफ्तार करना है। उसके पकड़े जाने के बाद पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि तीन करोड़ रुपये की नशीली दवाओं की खेप कहां से आई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
📡 स्रोत: NewsData.io