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'ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन' को चुनौती दे रहे तस्कर:युवा पीढ़ी की नसों में उतर रहा जहर, तस्कर के महीने में 25-30 ट्रिप का खुलासा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन' को चुनौती दे रहे तस्कर:युवा पीढ़ी की नसों में उतर रहा जहर, तस्कर के महीने में 25-30 ट्रिप का खुलासा

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और मीरगंज पुलिस द्वारा शनिवार को 2.60 करोड़ की हेरोइन के साथ पकड़े गए तस्कर जब्बार खां के खुलासे ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की अंदरूनी तस्वीर उजागर कर दी है। फरीदपुर का यह गिरोह सीधे तौर पर देहरादून के बड़े एजुकेशन हब, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और हॉस्टलों में रहने वाले छात्र-छात्राओं को अपना निशाना बना रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, उत्तराखंड को नशामुक्त करने के लिए चल रहे 'ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन' के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरेली का यही देहात रूट बनकर खड़ा हो गया है। एजुकेशन हब और हॉस्टल कल्चर सबसे आसान सॉफ्ट टारगेट देहरादून में चार दर्जन से अधिक बड़े निजी विश्वविद्यालय, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रसिद्ध बोर्डिंग स्कूल और कोचिंग संस्थान मौजूद हैं।

यहां देश भर से लाखों युवा पढ़ाई के सिलसिले में आते हैं और परिवारों से दूर हॉस्टलों व प्राइवेट पीजी (PG) में रहते हैं। तस्कर गिरोह कैंपस में सीधे दाखिल होने के बजाय पहले से नशे के आदी या महंगे शौक रखने वाले रईस छात्रों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद उन्हें फ्री खुराक और मोटी पॉकेट मनी का लालच देकर कैंपस और हॉस्टलों के भीतर 'सब-पेडलर' बना दिया जाता है, जिससे नशे का जाल तेजी से फैलता है।

कैफे, क्लब और वीकेंड रेव पार्टियों में पहुंच रहा सफेद जहर देहरादून के राजपुर रोड, मसूरी डायवर्जन, सहस्त्रधारा और झाझरा जैसे इलाकों में बने लग्जरी कैफे, प्राइवेट विला और फार्महाउस वीकेंड कल्चर के केंद्र हैं। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से वीकेंड मनाने आने वाले युवाओं की निजी पार्टियों और पबों में 'पार्टी ड्रग' के तौर पर स्मैक और हेरोइन की भारी मांग रहती है।

बरेली से सस्ते दामों में खरीदी गई यह खेप इन पार्टियों और पब-क्लबों तक पहुंचते ही चार से पांच गुना महंगी हो जाती है। तस्कर इसी भारी मुनाफे के दम पर एजुकेशन हब में नशे का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चला रहे हैं। बरेली-फरीदपुर का कुख्यात उत्तराखंड रूट, महीने में 25-30 चक्कर उत्तराखंड पुलिस और खुफिया एजेंसियों के रिकॉर्ड में बरेली का फरीदपुर, फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज क्षेत्र हेरोइन की सप्लाई का सबसे प्रमुख 'सोर्स पॉइंट' बना हुआ है।

तस्कर सड़क मार्ग से बरेली-रामपुर-मुरादाबाद-हरिद्वार होकर देहरादून पहुंचते हैं। इस रास्ते पर प्राइवेट कारों, उत्तराखंड परिवहन की बसों और टैक्सियों के जरिए छोटी-छोटी पुड़ियों में माल छिपाकर डिलीवर किया जाता है। पकड़े गए जब्बार खां द्वारा एक ही महीने में 25 से 30 बार बरेली से देहरादून की यात्रा करना साबित करता है कि वहां उसका एक तय और बंधा हुआ खरीदार नेटवर्क काम कर रहा था।

उत्तराखंड पुलिस के ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन पर सीधा प्रहार उत्तराखंड सरकार और पुलिस मुख्यालय ने राज्य को नशे से मुक्त करने के लिए 'ड्रग्स फ्री देवभूमि' अभियान को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है। देहरादून पुलिस और एएनटीएफ की पिछले कुछ वर्षों की कार्रवाइयों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि वहां पकड़े गए मादक पदार्थों के 60 से 70 फीसदी मामलों के तार सीधे बरेली, बदायूं और पश्चिमी यूपी के सप्लायरों से जुड़े मिलते हैं।

जब तक सप्लाई चेन के मुख्य केंद्र बरेली पर प्रहार नहीं होता, तब तक देवभूमि को नशामुक्त बनाने की मुहिम के सामने यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट गंभीर चुनौती पेश करता रहेगा।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

युवाओं के सपनों को नशे की जंजीरों में बाँधना, समाज की प्रगति को ठहराता है। तस्करों के काले व्यापार को रोकने के लिए हमें शिक्षा, रोजगार और जागरूकता को प्राथमिकता देनी चाहिए। हर छात्र को सुरक्षित वातावरण और सही मार्गदर्शन मिले, तभी वह अपनी क्षमता से समाज को समृद्ध कर सकता है। नशे के शिकारों के प्रति सहानुभूति दिखाएँ, पर साथ ही उन्हें पुनर्वास और पुनःशिक्षा के अवसर दें।

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