ड्राइविंग रेंज नहीं, कैसे तैयार हों अंतरराष्ट्रीय गोल्फर:कोर्ट का आदेश, फिर भी 10 साल से 4.21 एकड़ भूमि नहीं सौंप रहा जेडीए
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →18 होल का अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स है रामबाग गोल्फ क्लब। यहां कई बार पीजीटीआई टूर्नामेंट्स भी होते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के गोल्फर तैयार करने के लिए ड्राइविंग (प्रैक्टिस) रेंज नहीं है। गोल्फर को ड्राइविंग करनी है तो टूर्नामेंट के बाद ही प्रैक्टिस कर सकते हैं। राजस्थान से प्रखर असावा और ओजस्विनी सारस्वत जैसे कई युवा गोल्फर देश में नाम कमा रहे हैं।
गोल्फ की प्रैक्टिस के लिए प्रदेश के गोल्फर्स को दिल्ली का रुख करना पड़ता है। यह हालात तब हैं, जब यहां गोल्फ कोर्स के बीचोंबीच 4.21 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसका उपयोग नहीं हो रहा। कोर्ट के आदेश के बाद भी जमीन गोल्फ क्लब को उपलब्ध नहीं कराई है। जमीन खाली पड़ी, उपयोग नहीं रामबाग गोल्फ क्लब ऐसा ग्रीन कोर्स है, जहां बड़े-बड़े गोल्फ खिलाड़ी खेलना पसंद करते हैं।
कपिल देव भी यहां खेलने आए। क्लब के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रैक्टिस और ड्राइविंग रेंज के लिए पर्याप्त भूमि नहीं होना है। क्लब के कैप्टन योगेंद्र सिंह और सचिव समृद्ध शर्मा ने बताया कि 2000/2003 में हाईकोर्ट खंडपीठ के निर्देशों की पालना में राज्य सरकार ने गोल्फ के विकास के लिए 89.74 एकड़ जमीन आरक्षित की थी।
इसमें 4.21 एकड़ का स्टेबल क्षेत्र भी शामिल था। गत 10 साल से भूमि खाली पड़ी है, लेकिन क्लब को जेडीए कब्जा नहीं सौंप रहा। आज से शुरू होंगे 5 नए ग्रीन क्लब में पिछले दो वर्ष में गोल्फ कोर्स के विकास के कई महत्वपूर्ण काम हुए। क्लब में 7 नए ग्रीन विकसित किए गए हैं। इनमें 2 ग्रीन शुरू हो चुके हैं, जबकि शेष 5 नए ग्रीन का शुभारंभ 25 सितंबर को होगा।
क्लब के कैप्टन ने बताया कि खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए 3 प्रैक्टिस ग्रीन, 6 प्रैक्टिस बे और 1 सिंथेटिक ग्रीन भी विकसित किए जा चुके हैं। एकमात्र पूरी तरह ग्रीन गोल्फ कोर्स रामबाग गोल्फ क्लब पूरे राजस्थान में एकमात्र पूर्णतः ग्रीन गोल्फ कोर्स है, जहां देश-विदेश से आने वाले गोल्फर निर्धारित ग्रीन फीस देकर खेल सकते हैं।
अकेले अहमदाबाद में करीब 10 गोल्फ कोर्स मौजूद हैं, ऐसे में जयपुर में भी बेहतर अभ्यास और प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। मामला पुराना है। तत्काल कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसकी प्रक्रिया कहां तक पहुंची, फाइलें देखने के बाद ही पता चलेगा। -रवींद्र कुमार शर्मा, डिप्टी कमिश्नर, जेडीए जोन-1
📡 स्रोत: NewsData.io