ड्रोन निर्माण, परीक्षण और नवाचार के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया रोडमैप
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
राउंडटेबल में ड्रोन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें गरुड़, डीएफआई, आइडियाफोर्ज, एनएफएसयू, प्रखर और आईजेडआई सहित अनेक कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रतिभागियों ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के लिए सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक में ड्रोन क्षेत्र के लिए आवश्यक अधोसंरचना, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और प्रगतिशील नीतिगत ढांचे का लाभ उठाते हुए मध्यप्रदेश को ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए देश के पसंदीदा गंतव्यों में शामिल करने के रोडमैप की जानकारी दी गई।
इसमें ड्रोन निर्माण के लिए अधोसंरचना, साझा परीक्षण सुविधाएं, फ्लाइट टेस्टिंग क्षमताएं, नवाचार प्लेटफॉर्म और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिभा एवं कौशल विकास को शामिल किया गया है। राउंडटेबल में आईआईएसईआर भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के राज्य शासन के निर्णय को सराहा गया।
इसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, उत्पाद विकास, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, प्रौद्योगिकी सत्यापन और नई पीढ़ी के ड्रोन अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। जुलाई 2026 में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने लगभग 85.51 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति दी है।
इसमें एआई, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन्स, यूएवी डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य किया जाएगा। साथ ही प्रोटोटाइप परीक्षण, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को भी सहयोग मिलेगा।
ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर में ड्रोन निर्माण, प्रोटोटाइपिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग, प्रमाणन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एकीकृत अधोसंरचना विकसित की जाएगी।
हितधारकों ने कॉमन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं, कंपोनेंट टेस्टिंग लैब, फ्लाइट टेस्टिंग अधोसंरचना और उद्योग आधारित कौशल विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कई प्रतिभागियों ने ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, पायलट प्रोजेक्ट्स और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में राज्य के साथ साझेदारी में रुचि व्यक्त की।