दुकान बंद करने से पहले परिवार की जिंदगी का रास्ता खोलें : राहुल तिवारी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सरकारी नियमों के तहत कार्रवाई के साथ छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों की आजीविका बचाने की मांग
भोपाल।
रक्षाबंधन के अवसर पर मानव अधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल तिवारी ने भोपाल के रिहायशी क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट फूड वेंडर्स, महिलाओं और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को जारी किए जा रहे दुकानें बंद करने संबंधी नोटिसों को लेकर सरकार और प्रशासन से संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
राहुल तिवारी ने कहा कि वर्षों से अनेक छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर्स अपनी छोटी दुकानों तथा फूड स्टॉल के जरिए परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम और कानून का विरोध नहीं है, लेकिन जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां मान्य सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सरकार द्वारा निर्धारित नियम-कायदों के अनुरूप ही कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।
दुकान बंद हुई तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा?
तिवारी ने कहा कि कई दुकानदारों के लिए उनकी दुकान ही परिवार की आय का प्रमुख या एकमात्र साधन है। ऐसे में अचानक दुकान बंद होने की स्थिति में परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं द्वारा छोटे फूड स्टॉल और अन्य व्यवसायों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन को मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि दुकानें बंद कराने की कार्रवाई से पहले प्रभावित दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को वैकल्पिक स्थान, उचित व्यवस्था और पर्याप्त समय उपलब्ध कराया जाए।
साथ ही छोटे व्यापारियों के लिए व्यवहारिक नीति तैयार कर व्यवस्थित वैकल्पिक बाजार विकसित किया जाए, ताकि नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो और लोगों की आजीविका भी प्रभावित न हो। राहुल तिवारी ने कहा कि कानून जरूरी है, लेकिन रोजगार, मानवता और आजीविका की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
मानव अधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण संगठन की ओर से उनकी मांग है कि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जरूर हो, लेकिन ऐसी कार्रवाई की प्रक्रिया में गरीब और छोटे व्यापारियों के परिवारों के सामने आजीविका का संकट पैदा न हो। रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील करते हुए कहा—
“दुकान बंद करने से पहले, उस परिवार की जिंदगी का रास्ता खोलिए।”