दुनिया का सबसे सम्मानित नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान, भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला
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नई दिल्ली. नोबेल शांति पुरस्कार 2026 का ऐलान हो चुका है.
इस बार ये सम्मान भारतीय मूल की दिग्गज मानवाधिकार रक्षक और न्यायविद नवनेथम नावी पिल्लई को देने का फैसला लिया गया है.
नार्वेजियन नोबेल समिति ने अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और विश्व भर में शांति को बढ़ावा देने में उनके असाधारण जीवनभर के योगदान को लेकर उन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया है.
इस खबर के बाद दक्षिण अफ्रीका और भारत समेत पूरी दुनिया के मानवाधिकार समर्थकों में खुशी की लहर देखी जा रही है. 85 साल की न्यायाधीश शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाली नावी पिल्लई ने, दुनिया भर में हाल ही में हुई हिंसा को लेकर कई देशों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह बताया है.
उन्होंने हिंसा व संघर्ष के पीड़ितों को लेकर उम्मीद जगाई. पिल्लई दक्षिण अफ्रीका की 85 साल की न्यायाधीश हैं.
शांति का नोबेल प्राइज विजेता का ऐलान करते हुए, नोबेल प्राइज कमेटी के एक्स हैंडल से पोस्ट को शेयर किया गया.
इसमें संदेश दिया कि नावी पिल्लई अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों की महान पैरोकारों में से एक हैं.
उनका शानदार करियर हमें वैश्विक स्तर पर कानून के शासन का समर्थन करने, उसे मजबूत करने और विस्तार की जरूरत की याद दिलाता है.
अधिक शांतिपूर्ण दुनिया बनाना चाहते हैं न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति नावी पिल्लई की प्रतिबद्धता उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की तरह है जो एक अधिक शांतिपूर्ण दुनिया बनाना चाहते हैं.
नावी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र के अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की अध्यक्ष थीं, उसने बीते वर्ष यह निष्कर्ष निकला था. इजरायल ने गाजा में नरसंहार किया है. इजराइल ने इस रिपोर्ट को अपमानजनक बताकर खारिज कर दिया था.
संघर्षों को अहिंसक रूप से हल किया नोबेल प्राइज समिति ने शांति की पुरस्कार विजेता का ऐलान करते हुए लिखा कि इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करते हुए, नॉर्वे की नोबेल समिति विश्व को यह याद दिलाना चाहती है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन उस व्यवस्था का आधार है.
इससे हमने शांति सुनिश्चित करने और संघर्षों को अहिंसक रूप से हल करने को लेकर स्थापित किया है. शांति के लिए न्याय जरूरी है.
इतिहास गवाह है कि कानून के शासन के बिना चलने वाली दुनिया अन्यायपूर्ण, अविवेकी और अमानवीय होती है. न्यायाधीश- जो व्यवस्था और अराजकता के बीच संतुलन बनाकर रखते हैं. इसलिए प्रशंसा के पात्र हैं.
लेकिन आज, जब इन्हीं न्यायाधीशों पर रोक लगाई जा रही है और उनकी संस्थाओं पर हमले पर हमले हो रहे हैं, तो हमें साहस, दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प वाले लोगों की जरूरत है.
इस गुण को नावी पिल्लई ने न्यायपीठ में अपने काम से दिखाए हैं
📡 स्रोत: NewsData.io