दूसरा होर्मुज बनेगा बाल्टिक सागर? रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पश्चिमी देशों को क्यों दी चेतावनी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
President Putin Warn to Western Nations: होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच अब रूस ने बाल्टिक सागर को लेकर यूरोप को चेतावनी दी है.
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सवाल उठाया है कि क्या यूरोपीय देश बाल्टिक सागर में भी होर्मुज जैसे हालात पैदा करना चाहते हैं?
उन्होंने साफ कहा कि रूस युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर समुद्री रास्तों को रोकने या उसे चुनौती देने की कोशिश हुई तो मॉस्को चुप नहीं बैठेगा.
पुतिन के इस बयान को रूस और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उसे चुनौती दी गई तो वह जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा.
पुतिन ने खास तौर पर बाल्टिक सागर में समुद्री जहाजों की आवाजाही रोकने या उसमें बाधा डालने के खिलाफ आगाह किया.
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा होने पर बाल्टिक सागर में भी होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने सवाल किया कि क्या कोई बाल्टिक सागर में भी वही हालात चाहता है, जो खाड़ी या होर्मुज जलडमरूमध्य में हैं?" उन्होंने कहा कि रूस ऐसा नहीं चाहता, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब जरूर देगा.
यूरोप के साथ रिश्ते सुधारने को तैयार रूस पुतिन का यह बयान अफ्रीकी नेताओं के साथ एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी के बाद आया है.
इस दौरान उन्होंने फिनलैंड और नॉर्वे के नेताओं के साथ हाल में हुई बातचीत का भी जिक्र किया.
पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ने के बावजूद रूस यूरोप के देशों के साथ अपने रिश्ते सुधारने के लिए बातचीत को तैयार है.
उन्होंने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन वह ऐसा कोई संघर्ष नहीं चाहता.
पुतिन के मुताबिक, किसी भी देश को टकराव बढ़ाने से पहले उसके संभावित नतीजों के बारे में सोचना चाहिए. 'टकराव बढ़ा तो किसी की जीत नहीं होगी' रूसी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ा तो इसका नुकसान सभी पक्षों को उठाना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि बड़े संघर्ष की स्थिति में कोई भी देश जीतने की स्थिति में नहीं होगा. साथ ही उन्होंने यूरोपीय सरकारों से टकराव के खतरों को गंभीरता से लेने की अपील की.
फिनलैंड और नॉर्वे के नेताओं का किया बचाव पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे का भी बचाव किया. दोनों नेताओं ने इसी सप्ताह पुतिन से फोन पर बातचीत की थी.
यूरोप के कुछ देशों में इस बातचीत को लेकर आलोचना हुई थी. आलोचकों का मानना था कि रूस से सीधे बात करना यूरोपीय देशों के साझा रुख से अलग है. हालांकि, पुतिन ने इस बातचीत को जरूरी बताया.
उन्होंने कहा कि रूस और यूरोप के बीच रिश्ते सुधारने के लिए बातचीत जारी रहनी चाहिए. कहां है बाल्टिक सागर?
बाल्टिक सागर उत्तरी यूरोप में स्थित एक अर्ध-संलग्न समुद्र है, जो अटलांटिक महासागर से जुड़ा हुआ है. यह स्कैंडिनेवियाई प्रायद्वीप और उत्तरी-मध्य यूरोप के बीच फैला है.
इसके तट से डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड, रूस, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, पोलैंड और जर्मनी सहित 9 देश जुड़े हैं. इसमें बोथनिया, फिनलैंड और रीगा की प्रमुख खाड़ियां भी शामिल हैं.
डेनमार्क की जलसंधियों के जरिए यह उत्तरी सागर से जुड़ता है. क्यों अहम है? बाल्टिक सागर भौगोलिक के साथ-साथ सैन्य और व्यापारिक लिहाज से भी बेहद अहम है.
रूस को छोड़कर इसके तट से जुड़े सभी देश नाटो के सदस्य हैं, इसलिए यह रूस और नाटो के बीच रणनीतिक तनाव का प्रमुख क्षेत्र बन गया है.
रूस का कलिनिनग्राद क्षेत्र भी इसी सागर के किनारे स्थित है, जहां उसका महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा है.
इसके अलावा, यह उत्तरी यूरोप का प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग है, जहां से तेल, गैस और अन्य सामानों का परिवहन होता है.
समुद्र के नीचे बिछी गैस पाइपलाइनें और संचार केबल भी इसे यूरोप की ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती हैं.
📡 स्रोत: NewsData.io