ड्यूटी से गायब रहने वाले चिकित्सकों की होगी निगरानी, तय समय पर अस्पताल पहुंचना होगा जरूरी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल
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भोपाल, 1 सितंबर 2026। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में चिकित्सकों की समय पर उपलब्धता और आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक निर्धारित समय पर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहें और उनकी उपस्थिति एवं कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। चिकित्सकों की उपलब्धता में किसी तरह की कमी से मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए उपस्थिति की निगरानी और कार्यप्रणाली की समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर भर्ती को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विभाग में अन्य रिक्त पदों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की जानकारी लेते हुए आवश्यकता के अनुसार प्रक्रिया में तेजी लाने और स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता केवल अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों से नहीं, बल्कि वहां कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की समयबद्ध एवं जिम्मेदार सेवाओं से भी तय होती है। इसलिए विभागीय व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाते हुए मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह तथा आयुक्त धनराजू एस. सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर चिकित्सकों की समय पर ड्यूटी पर उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था से संबंधित है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अस्पतालों में चिकित्सकों के निर्धारित समय पर पहुँचने के लिए सख्त निगरानी लागू करने का निर्देश दिया है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉक्टरों का समय पर आना रोगियों के इलाज और आपातकालीन सेवाओं के सुचारू संचालन के लिये अनिवार्य है। यदि चिकित्सक समय पर उपलब्ध नहीं रहते, तो रोगियों को विलंबित उपचार, बढ़ती जटिलताएँ और स्वास्थ्य सेवाओं पर असंतोष का सामना करना पड़ सकता है। इससे आम जनता के स्वास्थ्य