एआईजी मिश्रा को उम्रकैद की सजा दिलवाने क्या-क्या सहा:बोली-मुझ पर 6 केस लगाए, सस्पेंड किया; फिर उस हैवान को सजा दिलवाना ही मकसद रहा
“मेरे पति का मध्यप्रदेश में कारोबार था। उसमें कारोबार से जुड़ी एक शिकायत के बाद वे जेल में थे। मेरे पति ने मुझसे कहा कि मैं तत्कालीन सीआईडी एआईजी अनिल मिश्रा से मुलाकात करूं। वे मेरी मदद करेंगे। लेकिन पति की मदद के नाम पर उसने हमारी हंसती-खेलती जिंदगी तबाह कर दी। वर्दी के भीतर वह हैवान था। पहली बार भोपाल के पुलिस ऑफिसर्स मेस में उसने मेरा रेप किया। मुझे अकेला पाकर वह मेरा पीछा करवाता रहा। उसका फोन न उठाने पर पुलिसवाला घर पर आ जाता था और कहता था कि साहब आपको फोन कर रहे हैं, फोन उठा लो। 2012 से 2014 तक दो साल तक मैं उसकी हैवानियत झेलती रही। फिर एक दिन उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी। शिकायत करने के बाद तो मेरी मुश्किलें और बढ़ गईं। मैं सरकारी नौकरी में थी। पता चला कि अगले कुछ दिनों में मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में मेरे खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज हो गए। राजस्थान पुलिस उसे तलाशती रही, लेकिन पांच साल तक उसका पता नहीं चला। वह ड्यूटी से गायब हो गया। 2019 में उसकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ समय बाद जमानत पर वह बाहर आ गया। उसके बाद भी हमें धमकियां मिलती रहीं। लेकिन मैंने, मेरे पति और दोनों बच्चों ने तय किया कि वर्दी पहने हुए इस भेड़िए को सजा दिलाना ही हमारी जिंदगी का मकसद है। मेरे बच्चे मुझे सिसकते हुए देखते रहे। मैं हर दिन तिल-तिल कर मरती रही। आखिरकार 29 जुलाई को राजस्थान की अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस दौरान वह सिर झुकाए कोर्ट के कटघरे में मौजूद था। मेरा परिवार उसे देख रहा था। हमें ऐसा लगा जैसे हमारी सालों की मुराद पूरी हो गई। उस शख्स ने मुझे और मेरे परिवार को जो दर्द दिया है, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती।” (रेप पीड़िता ने ये दर्द भास्कर रिपोर्टर से साझा किए) संडे स्टोरी में पढ़िए पीड़िता की पूरी आपबीती... पीड़िता ने बताया कि मार्च 2012 से जुलाई 2014 तक वह आरोपी की दरिंदगी का शिकार होती रही। दो साल बाद, 11 जुलाई 2014 को उसने जयपुर के महिला थाना दक्षिण में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के मुताबिक, उसके पति जेल में थे। पति के कहने पर ही वह अपने बड़े भाई के साथ 1 मार्च 2012 को एआईजी अनिल मिश्रा से मिलने भोपाल पहुंची थी। मिश्रा ने उसके पति से जुड़े मामलों में मदद करने का भरोसा दिया। 4 मार्च को वह राजस्थान लौट आई। इसके बाद मिश्रा के लगातार फोन और मैसेज आने लगे। कुछ दिन बाद मिश्रा ने कहा कि उसने वकील कर दिया है और उसे भोपाल आना होगा। वह 6 मार्च को दोबारा भोपाल पहुंची। जिस होटल में वह ठहरी थी, वहीं उसकी मुलाकात मिश्रा द्वारा बताए गए वकील से हुई। रात 1.30 बजे कमरे की डोर बेल बजी मिश्रा ने उससे होटल छोड़ने को कहा और बताया कि वहां रुकना सुरक्षित नहीं है। उसने उसे भोपाल में पुलिस मुख्यालय के सामने स्थित पुलिस ऑफिसर्स मेस में ठहरने को कहा। वहां उसके नाम पर कमरा रिजर्व था। पीड़िता के अनुसार, मिश्रा ने फोन पर बताया कि वह जोधपुर में है। रात के करीब 1.30 बजे उसके कमरे की डोर बेल बजी। वह घबरा गई। तभी फोन आया कि, "मैं अनिल मिश्रा हूं।" उसने डरते हुए दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही मिश्रा ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह पति की मदद का भरोसा दिलाता रहा और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के बाद मिश्रा सो गया, लेकिन वह पूरी रात रोती रही। बार-बार फोन करके परेशान करने लगा पीड़िता ने बताया कि 17 अक्टूबर 2012 को जयपुर पुलिस मेस में, अक्टूबर 2013 में एम्स अस्पताल के सामने स्थित एक होटल में और नवंबर 2013 में अन्य स्थानों पर भी उसके साथ ऐसी घटनाएं हुईं। उसके पति जेल में थे। मिश्रा उसे बार-बार फोन करता था। फोन नहीं उठाने पर कोई पुलिसवाला उसके घर पहुंच जाता था और कहता था कि साहब आपसे बात करना चाहते हैं। बेटी की अश्लील फोटो दिखाकर ब्लैकमेल किया पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसके परिवार और बच्चों को लेकर भी उसे डराया। फैसले में दर्ज उसके बयान के अनुसार, आरोपी ने उसकी बेटी की अश्लील फोटो दिखाई। फोटो दिखाकर कहा कि अगर उसने उसकी बात नहीं मानी तो उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। पीड़िता के वकील ने बताया कि आरोपी ने उसके घर के बाथरूम में हिडन कैमरा लगवा दिया था। पति बोले- मैं 9 साल जेल में रहा, सबकुछ बर्बाद हो गया पीड़िता के पति ने कहा, “मेरा कारोबार मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में था। एआईजी अनिल मिश्रा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मुझ पर और मेरे परिवार पर झूठे केस दर्ज करवाए। मेरा पूरा कारोबार तहस-नहस हो गया। अब हमें सिर्फ न्यायालय से ही उम्मीद है। मिश्रा को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद भी हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। मेरे परिवार पर लगे झूठे केसों में फैसला आना बाकी है। साथ ही यह डर भी है कि यदि वह जमानत पर बाहर आया तो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फिर हमें नई मुश्किलों में डाल सकता है। पीड़िता के पति कहते हैं, “हम एक प्रतिष्ठित परिवार से हैं। मेरे बच्चों ने अपने बचपन के 9 साल बिना पिता के गुजारे। मैं 2012 से 2021 तक जेल में रहा। मैं आपको बता नहीं सकता कि मेरे बच्चों ने कितनी मुश्किलें झेलीं। वे कैसे बड़े हुए और उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसे हुई।” आरोपी पुलिस अधिकारी था, जांच पर भी उठे सवाल कोर्ट के फैसले में आरोपी के पुलिस में विभिन्न पदों पर रहने और एआईजी स्तर के अधिकारी के रूप में कार्य करने से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपने पुलिस पद और प्रभाव का इस्तेमाल उसके पति से जुड़े मामलों और उसके खिलाफ चल रहे मुकदमों में किया। एफआईआर दर्ज होने के पांच साल बाद, 2019 में अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने उसे बर्खास्त कर दिया।
📡 स्रोत: NewsData.io