एफिल टावर विवाद पर MEA का रिएक्शन, कहा- 'दो पक्षों के बीच का मामला'
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पेरिस के एफिल टावर में बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के आध्यात्मिक गुरुओं के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को दूर रखे जाने वाले विवाद पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है.
भारत ने इसे दो पक्षों के बीच का मामला बताया है.
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमें पेरिस में BAPS संस्था की ओर से एक मंदिर खोले जाने की जानकारी है.
जहां तक टावर से जुड़े खास मामले की बात है, तो यह पूरी तरह से संबंधित संस्थाओं के बीच का मामला है.'
एफिल टावर से जुड़ा मुद्दा क्यों गरमाया?
BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों ने शनिवार (5 सितंबर 2026) को एफिल टावर का दौरा किया था.
लेबर संगठन की एक प्रतिनिधि डायने डावोइन ने फ्रांसीसी टेलीविजन को बताया कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटा दिया गया था, ताकि प्रतिनिधिमंडल वहां से गुजर सके.
एफिल टावर के कर्मचारियों ने एक बयान जारी कर उन पेशेवर निर्देशों की निंदा की, जिनके कारण महिला कर्मचारियों को उनके जेंडर के आधार पर कार्यस्थल से अलग रखा गया और उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को लाया गया.
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी सीईटीई ने स्वीकार किया है कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया था कि उसके दौरे का आयोजन इस तरह किया जाए कि महिलाओं के साथ बातचीत को यथासंभव सीमित रखा जा सके.
कंपनी ने कहा कि इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था.
पेरिस स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर ने इससे हुई असुविधा के लिए माफी मांगते हुए एक बयान भी जारी किया.
BAPS ने दिया ये जवाब
BAPS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हम उठाई गई चिंताओं को समझते हैं और उन्हें बेहद गंभीरता से लेते हैं.
हमारे प्रतिनिधिमंडल में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे, इसलिए अन्य पर्यटकों को कम से कम असुविधा हो, इसे ध्यान में रखते हुए एफिल टावर की टीम के साथ समन्वय कर दौरे का आयोजन टावर के खुलने के सामान्य समय की शुरुआत में किया गया था.
बयान में कहा गया है, हमारी जानकारी के अनुसार, किसी
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
पेरिस के एफिल टावर पर भारतीय BAPS संस्था के आध्यात्मिक गुरुओं के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को दूर रखने की बात पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दो पक्षों का मामला है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एफिल टावर एक विश्व प्रसिद्ध स्थल है और भारत-फ्रांस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है। अगर इस विवाद को हल नहीं किया गया तो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है और भारतीय समुदाय के बीच असंतोष बढ़ सकता है। आम जनता को इससे यह संदेश मिलता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक संव