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‘एक-एक रुपया जोड़कर घर बनाया, अब गंगा में समा रहा...’:भोजपुर में 105 परिवारों पर बेघर होने का संकट; रातभर जागकर गंगा से घर बचाने की गुहार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘एक-एक रुपया जोड़कर घर बनाया, अब गंगा में समा रहा...’:भोजपुर में 105 परिवारों पर बेघर होने का संकट; रातभर जागकर गंगा से घर बचाने की गुहार

"मजदूरी करके एक-एक रुपया जोड़कर घर बनाए थे। अब अगर घर गंगा जी में चला गया तो हमनी से दोबारा घर नहीं बनेगा... बाल-बच्चा लेकर स्कूल में ठहरे हैं, कोई देखने वाला नहीं है। रातभर जागकर दिन काट रहे हैं।

बस गंगा मईया से यही विनती कर रहे हैं कि अपना विकराल रूप शांत कर लें..." यह कहते-कहते भोजपुर के पिपरपाती गांव की महिला की आंखें भर आती हैं। दरअसल, पिपरपाती गांव के एक पीड़ित परिवार की यह बात सिर्फ एक घर की कहानी नहीं है।

यह उन 105 परिवारों का दर्द है, जिनकी आंखों के सामने उनका वर्षों की मेहनत से बनाया आशियाना उजड़ने के कगार पर है। बड़हरा प्रखंड के पिपरपाती गांव में गंगा का बढ़ता जलस्तर और तेज धार ग्रामीणों के लिए बाढ़ से ज्यादा अब आशियाना छिनने का डर बन गया है।

कटाव इतनी तेजी से हो रहा है कि देखते ही देखते कई कट्ठा जमीन नदी में समा चुकी है। चार से पांच घर गंगा में विलीन हो चुके हैं। किनारे बसे करीब सौ से अधिक घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने खतरे को देखते हुए लोगों से घर खाली करा दिए हैं। जिन घरों में कल तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा है।

दीवारों पर टंगे सामान हट चुके हैं और कई घरों की खिड़की, दरवाजे और चौखट तक उखाड़ लिए गए हैं। घर बचाने की उम्मीद खत्म, अब सामान बचाने की जद्दोजहद ग्रामीणों के लिए सबसे दर्दनाक दृश्य यह है कि वे अपने ही घर को छोड़ने से पहले उसकी एक-एक चीज बचाने में जुटे हैं। कोई दरवाजा खोलकर ले जा रहा है, तो कोई चौखट उखाड़ रहा है।

किसी ने घर का जरूरी सामान स्कूल में रख दिया है तो कोई रिश्तेदार के यहां सामान पहुंचा रहा है। जिनके पास कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है, उनका सामान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो आज जो घर खड़ा है, वह कल शायद दिखाई भी नहीं देगा।

वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया आशियाना आंखों के सामने नदी में समाने का खौफ लोगों को रातभर सोने नहीं दे रहा है। स्कूल बना सहारा, बारिश ने बढ़ाई परेशानी घर खाली होने के बाद कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर स्कूल में शरण लिए हुए हैं।

किसी के पास बिस्तर नहीं है तो किसी का जरूरी सामान सुरक्षित जगह पर नहीं पहुंच पाया है। ऊपर से बारिश ने परेशानी और बढ़ा दी है। अस्थायी ठिकानों में रह रहे परिवारों के लिए बच्चों और बुजुर्गों को बारिश से बचाना चुनौती बन गया है। गांव की गलियों और सुरक्षित स्थानों पर बैठी महिलाओं के चेहरों पर बेबसी और डर साफ दिखाई देता है।

वे बार-बार अपने घर की तरफ देखती हैं। उनकी चिंता सिर्फ दीवारों और छत की नहीं है, बल्कि उस जिंदगी की है जिसे उन्होंने उसी घर में वर्षों से संजोकर रखा था। प्रशासन की ओर से त्रिपाल और सामुदायिक किचन, लेकिन भविष्य की चिंता बरकरार जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए त्रिपाल और सामुदायिक किचन की व्यवस्था की गई है।

फिलहाल इससे लोगों को भोजन और बारिश से बचने में कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल उनके सामने यह है कि अगर गंगा उनका घर भी निगल गई तो वे कहां जाएंगे? पिपरपाती के लोगों की पूरी जिंदगी इस वक्त गंगा की धार पर टिकी हुई है। एक तरफ तेज बहती नदी है, दूसरी तरफ उजड़ता आशियाना और बीच में खड़े परिवार।

जिन हाथों ने मजदूरी कर ईंट-ईंट जोड़कर घर बनाया था, वही हाथ आज घर की खिड़की-दरवाजा उखाड़कर सामान बचाने में लगे हैं।

ग्रामीणों के पास अब गंगा से लड़ने की ताकत नहीं, बस प्रार्थना बची है—‘गंगा मईया शांत हो जाएं और हमारा बचा हुआ घर बच जाए।’ स्कूल में चरण ली हुई एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि मेरे पति ने मजदूरी करके कई सालों में घर बनवाया था। आज वो घर गंगा में चला गया,आज बेघर हो गए है। पांच महीने के बच्चे के साथ स्कूल में चरण लिए हुए है।

अब इतनी ताकत नहीं है कि कमा कर घर बनवा सके। मेरे पति बूढ़ा हो गए, चारों बेटा अलग है तो घर नहीं बन सकता है। रात में अचानक घर गिरने लगा,उसके बाद हमने हल्ला मचाना शुरू कर दिया, नहीं तो घर में सो लोग गंगा में समा जाते।

चुनाव में वोट लेने आते, लेकिन मजबूरी पर कोई नहीं आता चुनाव के समय लोग वोट लेने आते है,लेकिन मजबूरी पर कोई साथ नहीं देता है। घर में रखे राशन भी गंगा में चला गया,ड्राम में रखा आटा को चुरा लिया गया। गरीब परिवार कहा से समान लाएगा, क्या खायेगा कोई पूछने वाला नहीं है।

पिपरपाती गांव की महिला लक्ष्मीना देवी ने बताया कि आगे मौत है,पीछे खाई है। घर का एक हिस्सा में गंगा में समा गया है। समान इधर–उधर रखा हुआ है। जगह नहीं रहने के कारण समान घर में ही है । कब पूरा घर गंगा में विलीन हो जाए,कोई नहीं जानता है। पशु को खाने के लिए चारा तक नहीं है। घर में बीस से ज्यादा लोग रहते है।

सभी लोग दहशत में है। घर का समान रोड में ऐसी रखा हुआ है। पानी से भींग रहा है,कितना सामान कहा रखेंगे ।आदमी के लिए जगह नहीं है। आगे हमारे पास रोड पर रहने के सिवा,दूसरा कोई उपाय नहीं है। जवान बेटी–पतोह को लेकर कहां–कहां भटकेंगे। सरकार से यही मांग है कि शरण दे।

प्रभावती देवी ने बताया कि बहुत हमलोग परेशान है,हमलोगों के पास कोई साधन नहीं है। घर से गंगा दो फीट की दूरी पर है। कब घर गंगा में समा जाए,कोई नहीं जानता है। छोटे बच्चे और पतोह को उसके मायके भेज दिए है। हमलोग टकटकी लगाए हुए है गंगा मईया हमारे घर को छोड़ दे। सात से आठ लोग रहते है। मजदूरी करके परिवार चलता है।

घर चला जाएगा तो कहा रहेंगे। रोड पर रात गुजर रहा है। सरकार के तरफ से अभी कोई मदद नहीं मिला है। सरकार के तरफ से कोई मदद नहीं मिल मिल रहा अनीता देवी ने बताया कि अपने पांच महीने के बच्चों को लेकर स्कूल में ठहरे है। घर गंगा में चला गया है। यहां आने से बीमार पड़ गए है। बच्चे डर रहे है।

लेकिन कोई व्यवस्था नहीं किया गया है।स्कूल में दो टाइम का खाना दिया जा रहा है।अभी तो यही जिंदगी काटेगा,सरकार जल्द हमारी समस्याओं को सुने। परमात्मा चौधरी ने बताया कि इस गांव में हमारा बचपन बीता है, हमारे दादा–परदादाओ ने मजदूरी करके घर बनाया था। आज गंगा में विलीन हो गया है। अब मजदूरी करके घर नहीं बन पाएगा।

लगातार पानी बढ़ रहा है। कबतक ऐसी स्थिति रहेगी कोई नहीं जानता है। चुनाव के समय लोग यहां आते है। इस स्थिति में कोई पूछने नहीं आ रहा है। इसी स्कूल में जैसे तैसे रह रहे है। कोई सोता है तो कोई जगता है। सरकार के तरफ से कोई मदद नहीं मिल मिल रहा है। दोनों समय चावल खिलाया जा रहा है।

बलुआ पंचायत के मुखिया राहुल पांडेय ने बताया कि धनेश्वर यादव,काशी रजक,राम लाल चौधरी और अकलू यादव का घर गंगा में समा गया है। जबकि सौ से ज्यादा घरों को खाली करा दिया गया है। इस इलाके में डेढ़ सौ से ज्यादा घर है। जिसकी जनसंख्या 600 से 700 है। प्रशासन के तरफ से सामुदायिक किचन चलाया जा रहा है।

लाइट की व्यवस्था,मेडिकल टीम की तैनाती की गई है। गांव के आठ कमरे के स्कूल में कुछ लोग ठहरे हुए है और कुछ लोग अपने रिश्तेदार के घर चले गए है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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