एलन मस्क की बड़ी जीत! स्टारलिंक के भारत आने का रास्ता साफ
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
Starlink, Oneweb, Reliance Jio जैसी कंपनियों के सेटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ( inter ministerial panel) द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन की ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी देने की जानकारी सामने आ रही है.
बताया जा रहा है कि सचिवों के समूह ने ट्राई की सिफारिश को मंजूरी दे दी है.
हालांकि, अभी तक इस बार कोई आधिकारिक तौर पर जानकारी सामने नहीं आई है माना यह जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में कैबिनेट में इसको लेकर फैसला ले सकती है.
कब तक लॉन्च होगी सर्विस?
सूत्रों के अनुसार, सचिवों के समूह से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.
कैबिनेट की बैठक में अंतिम मंजूरी मिलते ही इसे देश में कानूनी तौर पर लागू कर दिया जाएगा.
बता दें कि Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी दिग्गज कंपनियों के पास पहले से ही GMPCS जैसे आवश्यक सैटेलाइट लाइसेंस मौजूद हैं.
कैबिनेट से स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों और फीस पर अंतिम मुहर लगते ही ये कंपनियां देश में कमर्शियल सेवाएं लॉन्च करने के बेहद करीब पहुंच जाएंगी.
5 साल के लिए मिलेगा स्पेक्ट्रम
TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, शुरुआती तौर पर कंपनियों को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम 5 साल की अवधि के लिए आवंटित किया जा सकता है.
बाजार की स्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार इस अवधि को आगे 2 साल के लिए और बढ़ा सकती है. यानी कुल मिलाकर यह व्यवस्था अधिकतम 7 साल तक चल सकती है.
एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी वैश्विक कंपनियां सामान्यतः 20 साल के लंबे लाइसेंस की मांग कर रही थीं, लेकिन TRAI ने एक नया और उभरता हुआ बाजार होने के कारण समय-सीमा को 5 साल तक सीमित रखने की सिफारिश की.
इसके जरिए सरकार यह देखना चाहती है कि शुरुआत में बाजार कैसे काम करता है और सुरक्षा मानकों का पालन कितनी सटीकता से होता है.
चूंकि सैटेलाइट इंटरनेट एक तेजी से बदलती हुई तकनीक है इसलिए 7 साल की सीमा के दौरान सरकार भविष्य में आने
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar