भोपाल

एमपी में कलेक्टरों की छोटी होती पोस्टिंग अवधि:किसी को ढाई महीने में हटाया, कोई दो महीने में लौटा; कार्रवाई और तबादलों से उठे सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एमपी में कलेक्टरों की छोटी होती पोस्टिंग अवधि:किसी को ढाई महीने में हटाया, कोई दो महीने में लौटा; कार्रवाई और तबादलों से उठे सवाल

मध्य प्रदेश शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए 11 जिलों के कलेक्टर समेत 23 आईएएस अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट जारी की है। 13 अक्टूबर को जारी इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा उन अफसरों की है, जिन्हें महज कुछ ही महीनों की अल्प अवधि में कलेक्टर पद से हटा दिया गया। तबादलों के पीछे हालिया प्रशासनिक चूक, किसान आंदोलन, भू-अर्जन विवाद और आदिवासी बच्चों की मौत जैसे मामले प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

कुमार सत्यम: ढाई महीने में बदला जिला 2017 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार सत्यम को 1 अगस्त 2026 को बालाघाट का कलेक्टर बनाया गया था। 13 अक्टूबर की तबादला सूची में उन्हें बालाघाट से हटाकर हरदा का कलेक्टर बनाया गया। इस तरह वे करीब ढाई महीने ही बालाघाट में पदस्थ रहे। जिले में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद यह बदलाव हुआ।

हालांकि, उन्हें कलेक्टर पद से हटाने के बजाय दूसरे जिले की जिम्मेदारी दी गई है, यानी उनकी जिला पदस्थापना बदली है, लेकिन कलेक्टर के रूप में काम जारी रहेगा। उषा परमार: एक साल बाद पन्ना से विदाई पन्ना की कलेक्टर उषा परमार को 3 अक्टूबर 2025 को जिले की जिम्मेदारी मिली थी। करीब एक साल बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया।

केन-बेतवा प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के आरोप और ग्रामीणों के आंदोलन के दौरान प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। तबादला सूची में उन्हें कलेक्टर पद से हटाकर उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। सोमेश मिश्रा: छह महीने में बदली जिम्मेदारी नर्मदापुरम के कलेक्टर सोमेश मिश्रा को 11 अप्रैल 2026 को जिले की जिम्मेदारी मिली थी।

करीब छह महीने बाद 13 अक्टूबर को जारी सूची में उनका तबादला कर दिया गया। नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में मूंग उत्पादक किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया था। किसान भोपाल भी पहुंचे थे। इस घटनाक्रम के दौरान जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। अंकित अस्थाना: दो महीने बाद फिर कलेक्टर बने आईएएस अधिकारी अंकित अस्थाना को 4 अगस्त 2026 को मंत्रालय में सामान्य प्रशासन विभाग का उप सचिव और कर्मचारी चयन मंडल का संचालक बनाया गया था।

करीब दो महीने बाद उन्हें फिर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे अब सिंगरौली के कलेक्टर होंगे। अस्थाना पहले भी कलेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं। मंत्रालय में कम अवधि तक पदस्थ रहने के बाद उनकी जिला प्रशासन में वापसी इस फेरबदल का एक प्रमुख पहलू है। कई कलेक्टरों की तीन साल से पहले बदली पदस्थापना तबादला सूची में ऐसे कई कलेक्टर भी शामिल हैं, जिनकी पदस्थापना तीन साल पूरे होने से पहले बदल दी गई।

इनमें बुरहानपुर के कलेक्टर हर्ष सिंह, शाजापुर की कलेक्टर ऋजु बाफना, मऊगंज के कलेक्टर संजय कुमार जैन, भिंड के कलेक्टर किरोड़ीलाल मीना, सिंगरौली के कलेक्टर गौरव बैनल और जबलपुर के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह शामिल हैं। हर्ष सिंह 30 जनवरी 2025 से बुरहानपुर में पदस्थ थे। ऋजु बाफना ने 5 जनवरी 2024 को शाजापुर की जिम्मेदारी संभाली थी।

संजय कुमार जैन 20 मार्च 2025 से मऊगंज, किरोड़ीलाल मीना 3 अक्टूबर 2025 से भिंड और गौरव बैनल 4 अक्टूबर 2025 से सिंगरौली में पदस्थ थे। राघवेंद्र सिंह ने 11 सितंबर 2025 को जबलपुर के कलेक्टर का पद संभाला था। चंबल आयुक्त और लोकायुक्त सचिव के पद पर भी नियुक्ति बाकी जिलों में फेरबदल के अलावा कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां भी होनी हैं।

चंबल आयुक्त सुरेश कुमार के सितंबर में रिटायर होने के बाद 1 अक्टूबर से ग्वालियर संभाग के आयुक्त मनोज खत्री के पास इस पद का अतिरिक्त प्रभार है। वहीं लोकायुक्त संगठन में सचिव के पद पर पदस्थ अरुणा गुप्ता अक्टूबर में रिटायर होने वाली हैं। ऐसे में 1 नवंबर से इस पद पर नई नियुक्ति की जरूरत होगी।

इसके अलावा कई वरिष्ठ अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों का प्रभार है। सरकार आने वाले दिनों में इन जिम्मेदारियों का भी पुनर्वितरण कर सकती है। बच्चों की मौत, भू-अर्जन विवाद और किसान आंदोलन वजह इस फेरबदल में कुछ अधिकारियों को कम अवधि में जिले से हटाया गया, जबकि कुछ को मंत्रालय से दोबारा कलेक्टरी मिली।

बच्चों की मौत, भू-अर्जन विवाद और किसान आंदोलन जैसे मामलों के बाद हुए बदलाव प्रशासनिक जवाबदेही की चर्चा को सामने लाते हैं। हालांकि, किसी अधिकारी के तबादले को सीधे दंडात्मक कार्रवाई मानने से पहले आधिकारिक आदेश और सरकार की ओर से बताए गए कारणों को देखना जरूरी है। यह खबर भी पढ़ें… 36 मौतों के बाद हटे, 284 दिन में कलेक्टरी मध्यप्रदेश सरकार ने 13 अक्टूबर की देर रात 23 IAS अधिकारियों की तबादला सूची जारी की।

इसमें तीन ऐसे अफसरों को फिर से मैदानी जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें गंभीर हादसों, लापरवाही या भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के बाद पदों से हटाया गया था। इनकी नई पोस्टिंग के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इनके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है या विभागीय कार्रवाई के बिना ही इन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई?

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📡 स्रोत: NewsData.io

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