भोपाल

एम्स भोपाल में 1 से 31 अक्टूबर तक स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाया जा रहा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में 1 से 31 अक्टूबर तक स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाया जा रहा

मेटास्टेटिक स्तन कैंसर: लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच है जरूरी

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल में 1 से 31 अक्टूबर तक स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाया जा रहा है, जिसमें जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला चल रही है।

• इसी क्रम में लोगों को मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के बारे में जानकारी दी गई।

• मेटास्टेटिक स्तन कैंसर में कैंसर स्तन से निकलकर हड्डियों, फेफड़ों, यकृत (लिवर) या मस्तिष्क तक फैल जाता है।

• नए या लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिन्हें पहले स्तन कैंसर रहा है, उन्हें दर्द, सांस की तकलीफ या सिरदर्द की चिकित्सकीय जांच जरूर करानी चाहिए।

एम्स भोपाल में 1 से 31 अक्टूबर तक स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाया जा रहा है। इस कड़ी में जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई जा रही है। इसी क्रम में लोगों को मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के बारे में जानकारी दी गई। स्तन कैंसर जब शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है, तो उसे मेटास्टेटिक स्तन कैंसर कहते हैं। ऐसे में नए या लगातार बने रहने वाले लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञ इलाज, सही जानकारी और परिवार का साथ मरीज के लिए बहुत मायने रखता है।

मेटास्टेटिक स्तन कैंसर वह स्थिति है, जिसमें कैंसर स्तन से निकलकर हड्डियों, फेफड़ों, यकृत (लिवर) या मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। इस अवस्था में बीमारी की विशेषताओं और मरीज की सेहत को देखते हुए इलाज की योजना बनाई जाती है।

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने कहा कि मेटास्टेटिक स्तन कैंसर में नए या लगातार बने रहने वाले लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय पर जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को विशेषज्ञ इलाज के साथ सही जानकारी और परिवार का सहारा भी मिलना चाहिए।

लगातार बने रहने वाले नए लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दर्द, सांस लेने में परेशानी या सिरदर्द जैसे लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले स्तन कैंसर हो चुका है, उनमें ऐसे बदलावों की चिकित्सकीय जांच जरूर करानी चाहिए।

शल्य कैंसर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने कहा कि जिन लोगों को पहले स्तन कैंसर हो चुका है, उन्हें दर्द, सांस की तकलीफ या सिरदर्द जैसे बदलावों की जांच जरूर करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान मरीजों के लिए भावनात्मक सहारा भी उतना ही जरूरी है।

मरीजों के लिए विशेषज्ञ इलाज के साथ भरोसेमंद जानकारी और भावनात्मक सहारा भी उतना ही जरूरी है। बीमारी के दौरान परिवार और समाज भी मरीजों का साथ देकर उनका हौसला बढ़ा सकते हैं।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।