भोपाल

एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फ़िजिशियन्स का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फ़िजिशियन्स का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फ़िजिशियन्स का 12वां राष्ट्रीय एवं 4था अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर 2026 तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फ़िजिशियन्स का 12वां राष्ट्रीय एवं 4था अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ISPPCON 2026) आयोजित होगा, जिसमें 100 से अधिक देश-विदेश के विशेषज्ञ शामिल होंगे और 200 से अधिक युवा पेन फ़िजिशियन्स को उन्नत दर्द उपचार तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण मिलेगा।

• भारत में लाखों मरीज, विशेष रूप से उन्नत अवस्था के कैंसर से पीड़ित मरीज, ऐसे दर्द से जूझ रहे हैं जिसका प्रभावी उपचार संभव है, जबकि शक्तिशाली ओपिओइड दवाओं के अनियंत्रित उपयोग से होने वाला संकट भी चिंता का विषय है।

• एम्स भोपाल की पेन मेडिसिन यूनिट पिछले नौ वर्षों में न्यूनतम चीरा आधारित उपचार प्रक्रियाओं से ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, कैंसर के दर्द, घुटने के गठिया, फ्रोज़न शोल्डर, कूल्हे के दर्द, कमर दर्द और साइटिका से पीड़ित हजारों मरीजों का उपचार कर चुकी है।

• इन प्रक्रियाओं में अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे की मदद से दर्द के वास्तविक स्रोत की पहचान कर उसी स्थान पर सटीक उपचार किया जाता है। अधिकांश मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती और वे उपचार के बाद उसी दिन घर जा सकते हैं।

एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर 2026 तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फ़िजिशियन्स का 12वां राष्ट्रीय एवं 4था अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ISPPCON 2026) आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में भारत और विदेशों के 100 से अधिक विशेषज्ञ दर्द विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल होंगे। 2 अक्टूबर को पूर्व-सम्मेलन कार्यशालाओं में देश के विभिन्न हिस्सों और सुदूर जिलों से आने वाले 200 से अधिक युवा पेन फ़िजिशियन्स को उन्नत हस्तक्षेपी दर्द उपचार तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेषज्ञ आधुनिक दर्द उपचार और नई तकनीकों से जुड़ा अपना अनुभव नई पीढ़ी के चिकित्सकों के साथ साझा करेंगे।

यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत में दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए प्रभावी उपचार की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। लाखों मरीज, विशेष रूप से उन्नत अवस्था के कैंसर से पीड़ित मरीज, ऐसे दर्द के साथ जीवन जीने को मजबूर हैं, जिसे आधुनिक चिकित्सा से कम किया जा सकता है। चिकित्सकीय मॉर्फ़ीन की प्रति व्यक्ति खपत के मामले में भारत आज भी दुनिया के सबसे कम उपयोग वाले देशों में शामिल है।

दूसरी ओर, शक्तिशाली ओपिओइड दवाओं के अनियंत्रित उपयोग से होने वाला संकट भी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती है। अमेरिका में फ़ेंटानिल जैसी शक्तिशाली ओपिओइड दवाओं के अनियंत्रित उपयोग ने दर्द के उपचार से जुड़ी समस्या को गंभीर ओवरडोज़ संकट में बदल दिया है और हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह ऐसा रास्ता अपनाए, जिसमें मरीजों को प्रभावी दर्द से राहत मिले और शक्तिशाली ओपिओइड दवाओं पर अनावश्यक निर्भरता भी न बढ़े।

इसी दिशा में एम्स भोपाल में आधुनिक दर्द उपचार की ऐसी प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें शरीर पर कम चीरा लगाकर दर्द के वास्तविक स्रोत का उपचार किया जाता है। न्यूनतम चीरा आधारित दर्द एवं रीढ़ की उपचार प्रक्रियाओं में दर्द विशेषज्ञ चिकित्सक अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे की मदद से दर्द की सही जगह की पहचान करते हैं और उसी स्थान पर उपचार करते हैं। इससे आसपास के स्वस्थ हिस्सों पर अनावश्यक प्रभाव कम होता है।

दर्द विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी मूल विशेषज्ञता के बाद दर्द के उपचार के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इन प्रक्रियाओं का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि मरीज को बड़े ऑपरेशन से बचाया जा सकता है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर शल्य चिकित्सा का विकल्प भी बना रहता है। अधिकांश मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं होती और वे उपचार के बाद उसी दिन घर लौट सकते हैं।

एम्स भोपाल की पेन मेडिसिन यूनिट के प्रभारी तथा सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. अनुज जैन (पेन मेडिसिन यूनिट प्रभारी एवं सम्मेलन आयोजन सचिव) ने कहा कि भारत में आने वाले समय में दर्द के उपचार की आवश्यकता तेजी से बढ़ेगी। इसके कारण अभी से दिखाई दे रहे हैं। देश में कैंसर का बढ़ता बोझ और मोटापे की बढ़ती समस्या घुटनों के गठिया, कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्याओं को बढ़ा रही है।

डॉ. अनुज जैन ने कहा कि भारत को अभी से सुरक्षित और प्रभावी, ओपिओइड पर कम निर्भरता वाले दर्द उपचार की क्षमता विकसित करनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में हमारे सामने दो ही विकल्प रह सकते हैं—मरीजों को दर्द में छोड़ देना या शक्तिशाली ओपिओइड दवाओं पर अत्यधिक निर्भर होना। दोनों ही स्थितियां स्वीकार्य नहीं हैं।

एम्स भोपाल की पेन मेडिसिन यूनिट ने अपनी सेवाओं के नौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान यूनिट ने न्यूनतम चीरा आधारित उपचार प्रक्रियाओं के माध्यम से ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, कैंसर के दर्द, घुटने के गठिया, फ्रोज़न शोल्डर, कूल्हे के दर्द, कमर दर्द और साइटिका से पीड़ित हजारों मरीजों का उपचार किया है। इनमें से अधिकांश मरीजों को खुली शल्य चिकित्सा से बचाया जा सका है।

यूनिट ने ऐसे मरीजों का भी उपचार किया है, जिनकी रीढ़ की हड्डी में कैंसर फैलने के कारण फ्रैक्चर हो गया था। ऐसी स्थिति में मरीज के लिए बिस्तर से उठना और चलना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे मरीजों को एक ही दिन की उपचार प्रक्रिया के बाद दर्द से राहत मिली और वे दोबारा चलने-फिरने में सक्षम हुए।

सीता देवी की रीढ़ की हड्डी में कैंसर फैल गया था। काइफ़ोप्लास्टी कराने के बाद उन्हें दर्द से राहत मिली और वे आज भी जीवन जी रही हैं। इसी तरह शबाना दस वर्षों से अधिक समय से साइटिका की समस्या से परेशान थीं। ट्रांसफ़ोरामिनल न्यूनतम चीरा आधारित प्रक्रिया के बाद उन्हें काफी राहत मिली। उपचार के दो वर्ष से अधिक समय बाद भी वे बिना किसी रुकावट के चल-फिर सकती हैं।

यह सम्मेलन किसी एम्स द्वारा आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फ़िजिशियन्स का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन है। सम्मेलन में एम्स नई दिल्ली, जिपमर, टाटा मेमोरियल, एसजीपीजीआई और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात से भी विशेषज्ञ चिकित्सक सम्मेलन में भाग लेंगे।

2 अक्टूबर 2026 को आयोजित पूर्व-सम्मेलन कार्यशालाओं में देश के हर हिस्से और सुदूर जिलों से आए 200 से अधिक युवा पेन फ़िजिशियन्स को उन्नत हस्तक्षेपी उपचार तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य युवा चिकित्सकों को आधुनिक दर्द उपचार की जानकारी देना और देश में सुरक्षित एवं प्रभावी दर्द उपचार की विशेषज्ञ क्षमता को मजबूत करना है।

यह सम्मेलन राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से मान्यता प्राप्त है और इसमें 8 सतत चिकित्सा शिक्षा क्रेडिट घंटे उपलब्ध होंगे। सम्मेलन के माध्यम से दर्द के आधुनिक उपचार, न्यूनतम चीरा आधारित प्रक्रियाओं और मरीजों को सुरक्षित एवं प्रभावी राहत देने के तरीकों पर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श होगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।