एम्स भोपाल ने छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के तहत सांची में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
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सांची में एम्स भोपाल का जागरूकता अभियान: दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित उपयोग का संदेश
मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग ने छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के तहत सांची के सिविल अस्पताल (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र), जिला रायसेन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
• उपभोक्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं व चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित उपयोग तथा प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग के बारे में जागरूक किया गया।
• सुश्री दीपा चौधरी (फार्माकोविजिलेंस एसोसिएट) और श्री आकाश ठाकुर (मैटेरियोविजिलेंस एसोसिएट) ने दवाओं के तर्कसंगत उपयोग और रिपोर्टिंग के तरीकों की जानकारी दी।
• डॉ. अश्विन बाबू (जूनियर रेजिडेंट, फार्माकोलॉजी विभाग) ने स्टेरॉयडयुक्त क्रीम के अनुचित इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में आगाह किया।
• कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित उपयोग तथा प्रतिकूल घटना रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने की शपथ ली।
एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग ने सांची के सिविल अस्पताल (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र), जिला रायसेन में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आम लोगों को दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी दी।
फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स भोपाल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया निगरानी केंद्र (एएमसी), चिकित्सा उपकरण प्रतिकूल घटना निगरानी केंद्र (एमडीएमसी) तथा क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) के रूप में कार्य करता है। यह केंद्र भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) और भारतीय मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (एमवीपीआई) के अंतर्गत काम करता है।
यह जागरूकता कार्यक्रम सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के सहयोग से "तर्कसंगत दवाएं और सुरक्षित चिकित्सा उपकरण: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा के लिए फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस को मजबूत करना" विषय पर आयोजित छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह (17 से 23 सितंबर 2026) समारोह का हिस्सा था।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों के तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना था। साथ ही उन्हें दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी संदिग्ध प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान सुश्री दीपा चौधरी (फार्माकोविजिलेंस एसोसिएट) और श्री आकाश ठाकुर (मैटेरियोविजिलेंस एसोसिएट) ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के तर्कसंगत उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने रोगी सुरक्षा को बढ़ावा देने में फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस की भूमिका पर भी जोर दिया।
प्रतिभागियों को दवाओं के उचित उपयोग, चिकित्सकीय सलाह का पालन करने, बिना जरूरत खुद से दवा न लेने और दवाओं या चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध प्रतिकूल घटना की रिपोर्ट करने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध विभिन्न रिपोर्टिंग माध्यमों की भी जानकारी दी, जिनमें पीवीपीआई की टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-180-3024), पीवीपीआई मोबाइल एप्लिकेशन और उपभोक्ता रिपोर्टिंग फॉर्म शामिल हैं।
फार्माकोलॉजी विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. अश्विन बाबू ने विशेष रूप से स्टेरॉयडयुक्त संयोजन क्रीम (टॉपिकल स्टेरॉयड कॉम्बिनेशन क्रीम) के अनुचित इस्तेमाल पर बात की। उन्होंने बताया कि इस तरह की क्रीम का उपयोग फंगल संक्रमण, मुंहासों, मेलास्मा (चेहरे पर काले धब्बे) या त्वचा को गोरा करने जैसे कॉस्मेटिक उद्देश्यों के लिए मनमाने ढंग से नहीं किया जाना चाहिए। प्रतिभागियों को स्टेरॉयड के अनुचित और लंबे समय तक इस्तेमाल से होने वाले संभावित हानिकारक प्रभावों के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग का समर्थन करने तथा प्रतिकूल घटना रिपोर्टिंग को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने की शपथ ली। कार्यक्रम का समापन जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवा प्रथाओं को प्रोत्साहित करने और रोगी सुरक्षा तथा एक सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।