एम्स भोपाल में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना जागरूकता शिविर
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मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के एआरटी सेंटर में सामाजिक सुरक्षा योजना जागरूकता शिविर आयोजित हुआ।
• 40-45 मरीजों को सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभ, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
• आधार और अन्य जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में मदद दी गई।
• मुख्य अतिथि सविता ठाकुर (उप निदेशक, आईईसी, भोपाल) ने साथी और परिवार को एचआईवी स्थिति बताने तथा सुरक्षा के उपाय अपनाने पर जोर दिया।
• डॉ. सागर खड़ंगा ने नियमित दवा और जांच की सलाह दी।
एम्स भोपाल के एआरटी सेंटर में एचआईवी और एड्स के साथ जी रहे लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति (एमपीएसएसीएस) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के सहयोग से हुए इस शिविर में 40-45 मरीजों को सरकारी कल्याण योजनाओं की जानकारी दी गई। शिविर में आधार और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी परेशानियां दूर करने में भी मदद की गई, ताकि पात्र मरीज योजनाओं का लाभ ले सकें।
एम्स भोपाल का एआरटी सेंटर लगभग 1600 एचआईवी और एड्स प्रभावित लोगों का इलाज करता है।
शिविर में विहान और एम्स भोपाल के एआरटी सेंटर की टीम ने मरीजों को एचआईवी और एड्स मरीजों के लिए उपलब्ध सरकारी कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के फायदे, पात्रता की शर्तें और लाभ पाने की प्रक्रिया समझाई। आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने में भी सहायता दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एमपीएसएसीएस की ओर से सविता ठाकुर (उप निदेशक, आईईसी, भोपाल) थीं। उन्होंने मरीजों से कहा कि वे अपनी एचआईवी स्थिति के बारे में अपने यौन साथी और परिवार के सदस्यों को जरूर बताएं। उन्होंने एचआईवी के प्रसार को रोकने के लिए कंडोम और अन्य सुरक्षा उपायों का अनिवार्य रूप से उपयोग करने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने चैंपियन एचआईवी मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया।
एआरटी सेंटर, एम्स भोपाल के नोडल अधिकारी डॉ. सागर खड़ंगा ने मरीजों से अपील की कि एचआईवी की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं और जीवन बचाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि नियमित दवा लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता की स्थिति जानने के लिए सीडी4 और वायरल लोड की जांच नियमित रूप से कराएं। साथ ही अवसरवादी संक्रमण से बचने के लिए कच्चे फल-सब्जियां और बाहर का खाना खाने से बचने को कहा।
डॉ. खड़ंगा ने यह भी कहा कि बुखार, खांसी, वजन घटना, गर्दन में सूजन या रात में पसीना आने जैसे लक्षण हों तो एचआईवी के मरीज तुरंत नजदीकी सरकारी एचआईवी उपचार केंद्र जाएं।