भोपाल

एम्स भोपाल में एमपी-ट्रोपाकॉन का तीसरा सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित

लेखक: DD Bhopal अंतिम अपडेट: 17 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में एमपी-ट्रोपाकॉन का तीसरा सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित

एम्स भोपाल में एमपी-ट्रोपाकॉन का तीसरा सम्मेलन:

परजीवी रोगों की रोकथाम के लिए मानव, पशु और पर्यावरण के साझा स्वास्थ्य पर जोर

मुख्य बिंदु:

• एम्स भोपाल ने भारतीय उष्णकटिबंधीय परजीवी विज्ञान अकादमी (इंडियन एकेडमी ऑफ़ ट्रॉपिकल पैरासिटोलॉजी) के मध्य प्रदेश अध्याय का तीसरा वार्षिक राज्य सम्मेलन एमपी-ट्रोपाकॉन (MP-TROPACON) सफलतापूर्वक आयोजित किया।

• सम्मेलन में मलेरिया, फाइलेरियासिस, जिआर्डियासिस जैसे परजीवी रोगों की जल्द पहचान, बीमारी की निगरानी और रोकथाम पर चर्चा हुई।

• कार्यशाला में 13 मेडिकल कॉलेजों के 26 सूक्ष्मजीव विज्ञान विशेषज्ञों को परजीवी रोगों की सामान्य और आधुनिक जांच विधियों का प्रशिक्षण दिया गया।

• सम्मेलन में एम्स भोपाल, आईसीएमआर-एनआईआरईएच (ICMR-NIREH), आईसीएआर-एनआईएचएसएडी (ICAR-NIHSAD) और राज्य पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों ने मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को साथ लेकर रोगों पर नियंत्रण की जरूरत बताई।

• विशेषज्ञों ने तेजी से हो रहे शहरीकरण से परजीवी रोगों के बदलते स्वरूप पर चर्चा की और रोगों की जांच, निगरानी तथा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों एवं अन्य वाहकों के नियंत्रण के प्रयास लगातार जारी रखने पर जोर दिया।

परजीवी रोगों की समय पर पहचान और उनकी रोकथाम को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एम्स भोपाल ने भारतीय उष्णकटिबंधीय परजीवी विज्ञान अकादमी (इंडियन एकेडमी ऑफ़ ट्रॉपिकल पैरासिटोलॉजी) के मध्य प्रदेश अध्याय का तीसरा वार्षिक राज्य सम्मेलन एमपी-ट्रोपाकॉन (MP-TROPACON) आयोजित किया। सम्मेलन का विषय “वन हेल्थ इंटरफेस पर परजीवी विज्ञान : दृष्टिकोण और रणनीतियाँ” था।

परजीवी रोग वे बीमारियां हैं जो ऐसे सूक्ष्म जीवों या जीवों के कारण होती हैं जो मानव शरीर में रहकर बीमारी पैदा करते हैं। मलेरिया, फाइलेरियासिस और जिआर्डियासिस इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन रोगों की समय पर पहचान और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं और बीमारी के फैलाव को कम करने में मदद मिलती है।

यह कार्यक्रम एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) माधवानन्द कर के नेतृत्व में हुआ। सम्मेलन का आयोजन एम्स भोपाल के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ.) देबासिस बिस्वास ने की और डॉ. आयुष गुप्ता (अतिरिक्त प्रोफेसर) ने आयोजन सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

वैज्ञानिक कार्यक्रम की शुरुआत एक दिवसीय पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला से हुई। इसमें मलेरिया, फाइलेरियासिस, जिआर्डियासिस और अन्य परजीवी संक्रमणों की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक और नई जांच विधियों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। मध्य प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेजों के 26 सूक्ष्मजीव विज्ञान विशेषज्ञों ने इसमें भाग लिया। प्रतिभागियों को परजीवी रोगों की सामान्य जांच के साथ-साथ आधुनिक और उन्नत जांच विधियों की जानकारी दी गई।

इस सम्मेलन में प्रसिद्ध परजीवी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. सी. परिजा और एम्स नई दिल्ली के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बी. आर. मिर्धा ने सम्मेलन में भाग लिया। मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ संकाय सदस्य और प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हुए।

सम्मेलन का मुख्य विषय ‘वन हेल्थ’ यानी ‘एकीकृत स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण रहा। इसका मतलब है कि इंसानों का स्वास्थ्य केवल इंसानों से जुड़े कारणों पर निर्भर नहीं करता। पशुओं का स्वास्थ्य और हमारे आसपास का पर्यावरण भी मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसलिए कई संक्रामक और परजीवी रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य, पशुपालन और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों को मिलकर काम करना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने बताया कि परजीवी रोगों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बीमारी की जल्द पहचान, लगातार निगरानी और बीमारी फैलाने वाले मच्छरों तथा अन्य वाहकों का नियंत्रण जरूरी है। इन उपायों से बीमारी को समय रहते पहचानने और उसके फैलाव को रोकने में मदद मिल सकती है।

सम्मेलन में एम्स भोपाल, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIREH), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD) और राज्य पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने मानव और पशु स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर चर्चा की। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण परजीवी रोगों के स्वरूप में हो रहे बदलाव पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते पर्यावरण और जीवनशैली के साथ रोगों के फैलने के तरीके में भी बदलाव आ सकता है। इसलिए रोगों की निगरानी और समय पर जांच को लगातार मजबूत करना जरूरी है।

सम्मेलन में पिछले दस वर्षों के दौरान तीन परजीवी रोगों से जुड़ी और बीमारी फैलाने वाले वाहकों के माध्यम से फैलने वाली बीमारियों के नियंत्रण में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने कहा कि अब तक मिली उपलब्धियों को बनाए रखने के लिए बीमारी की पहचान, निगरानी और रोग फैलाने वाले वाहकों के नियंत्रण के प्रयास लगातार जारी रखने होंगे।

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DD Bhopal

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