एम्स भोपाल के कैंसर उपचार और शोध को राष्ट्रीय सराहना
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आईएसएमपीओसीओएन 2026 में एम्स भोपाल के कैंसर उपचार और शोध को राष्ट्रीय सराहना
मुख्य बिंदु: • बेंगलुरु में 24 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित देश के सबसे बड़े कैंसर रोग विशेषज्ञ सम्मेलनों में से एक आईएसएमपीओसीओएन 2026 में लगभग 1000 प्रतिनिधि और देश-विदेश के विशेषज्ञ शामिल हुए।
• एम्स भोपाल की डॉ. आकांक्षा चौधरी (सहायक प्रोफेसर, मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग) ने विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया।
• डॉ. आकांक्षा चौधरी और डॉ. कंवल पंडिता (अस्पताल प्रशासन विभाग) के कैंसर मरीज़ों में मृत्यु पर अध्ययन को वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. अनामिका राजे ने प्रस्तुत किया।
• अध्ययन में ठोस ट्यूमर वाले कैंसरों में पाचन तंत्र के कैंसर से लगभग 40 प्रतिशत मृत्यु हुईं, रक्त और लसीका तंत्र के कैंसरों में एएमएल से सबसे अधिक, और सबसे अधिक मृत्यु 40 से 60 वर्ष की आयु में हुईं।
• एम्स भोपाल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी के मरीज़ सेवा और शोध कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
बेंगलुरु में आयोजित आईएसएमपीओसीओएन 2026 में एम्स भोपाल ने कैंसर मरीज़ों में मृत्यु पर अपना अध्ययन प्रस्तुत किया। यह देश के कैंसर रोग विशेषज्ञों के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक है। इसमें लगभग 1000 प्रतिनिधि और विभिन्न संस्थानों के संकाय सदस्य (फैकल्टी) शामिल हुए। कुछ अंतरराष्ट्रीय वक्ता भी सम्मेलन में उपस्थित रहे।
एम्स भोपाल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा चौधरी (सहायक प्रोफेसर) ने इस सीएमई में विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन विभाग की डॉ. कंवल पंडिता के साथ मिलकर कैंसर मरीज़ों में मृत्यु पर एक अध्ययन किया था।
युवा चिकित्सकों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इस अध्ययन के निष्कर्ष विभाग की वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. अनामिका राजे ने इस प्रतिष्ठित सीएमई में प्रस्तुत किए।
अध्ययन के अनुसार, ठोस ट्यूमर में सबसे अधिक मृत्यु पाचन तंत्र के कैंसर के मरीज़ों में हुई। यह कुल मृत्यु का लगभग 40 प्रतिशत रहा। वहीं रक्त और लसीका तंत्र से जुड़े कैंसरों (हीमैटोलिम्फॉइड ट्यूमर) में सबसे अधिक मृत्यु एएमएल (एक्यूट माइलॉइड ल्यूकेमिया, यानी रक्त कोशिकाओं का तेज़ी से बढ़ने वाला कैंसर) के मामलों में दर्ज की गई। मृत्यु के मामलों में सबसे अधिक संख्या 40 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की रही।
मृत्यु के कारणों का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है कि इससे उपचार की पद्धतियों, सहयोगी स्टाफ, देखभाल करने वाले परिजनों और पूरी व्यवस्था में कोई कमी हो तो उसे जांचने का अवसर मिलता है। इससे मृत्यु दर घटाने के प्रयासों को दिशा मिलती है।
सम्मेलन के दौरान डॉ. आकांक्षा चौधरी ने देशभर के जाने-माने विशेषज्ञों से भी चर्चा की। इनमें एम्स दिल्ली, टाटा मेमोरियल अस्पताल (मुंबई), जिपमर (पुडुचेरी), अड्यार कैंसर सेंटर (चेन्नई) और किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (बेंगलुरु) के संकाय सदस्य शामिल थे।
इस सम्मेलन के माध्यम से एम्स भोपाल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी की मरीज़ सेवाओं और शोध कार्य की झलक राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची, जिसकी व्यापक सराहना हुई।