एम्स भोपाल ने मनाया छठा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह
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आम लोगों तक पहुंचा सुरक्षित दवा और सुरक्षित चिकित्सा उपकरण का संदेश
मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग (औषधि विज्ञान विभाग) ने 17 से 23 सितंबर 2026 तक छठा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह मनाया। इस वर्ष का विषय "तर्कसंगत दवाएं और सुरक्षित चिकित्सा उपकरण: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा के लिए फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस को सशक्त बनाना" रहा।
• सांची के सिविल अस्पताल (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और रतिबड़ के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जागरूकता कार्यक्रम हुए। लोगों को पीवीपीआई की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-3024, मोबाइल एप और उपभोक्ता रिपोर्टिंग फॉर्म की जानकारी दी गई।
• एम्स भोपाल के अस्पताल परिसर और पास की दवा दुकानों में पोस्टर लगाए गए और पर्चे बांटे गए। ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) के प्रतीक्षा क्षेत्रों में उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम भी हुआ।
• पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताओं में नर्सिंग अधिकारियों, नर्सिंग और फार्मेसी के विद्यार्थियों ने भाग लिया और विजेताओं को सम्मानित किया गया।
• भोपाल के तीन फार्मेसी कॉलेजों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को फार्माकोविजिलेंस के बारे में जागरूक किया गया।
एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग (औषधि विज्ञान विभाग) ने 17 से 23 सितंबर 2026 तक छठा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह मनाया। फार्माकोविजिलेंस का अर्थ है दवाओं के दुष्प्रभावों पर नजर रखना और उनकी जानकारी एकत्र करना। यह विभाग भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) के तहत एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर (एएमसी, यानी दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी केंद्र) के रूप में कार्य करता है।
साथ ही भारतीय मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (एमवीपीआई) के तहत मेडिकल डिवाइसेज एडवर्स इवेंट मॉनिटरिंग सेंटर (एमडीएमसी, यानी चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी केंद्र) भी है। इसके अलावा यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए फार्माकोविजिलेंस एवं मैटेरियोविजिलेंस का क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) है।
इस वर्ष सप्ताह का विषय "तर्कसंगत दवाएं और सुरक्षित चिकित्सा उपकरण: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा के लिए फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस को सशक्त बनाना" रहा। सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य पेशेवरों, स्वास्थ्य कर्मियों, फार्मासिस्टों, मरीजों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए कई जागरूकता और जन-संपर्क गतिविधियां हुईं। इनमें जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर अभियान और पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। पीवीपीआई और एमवीपीआई की जानकारी देने वाली सामग्री भी बांटी गई।
सप्ताह की शुरुआत 17 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के सांची स्थित सिविल अस्पताल (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में जागरूकता अभियान से हुई। इसके बाद 18 सितंबर 2026 को पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) रतिबड़ के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इन कार्यक्रमों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग पर जोर दिया गया।
लोगों को बताया गया कि किसी दवा या उपकरण से संदिग्ध प्रतिकूल घटना हो तो उसकी सूचना देना जरूरी है। उपभोक्ता स्वयं भी सूचना दे सकते हैं। इसके लिए पीवीपीआई की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-3024, पीवीपीआई मोबाइल एप और उपभोक्ता रिपोर्टिंग फॉर्म की जानकारी दी गई।
19 और 21 सितंबर 2026 को फार्माकोविजिलेंस एवं मैटेरियोविजिलेंस पोस्टर अभियान चला। जागरूकता पोस्टर एम्स भोपाल की आईपीडी (भर्ती मरीजों के विभाग) गांधी गैलरी, ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) और वार्डों में लगाए गए। पास की दवा दुकानों पर भी पोस्टर लगाए गए। पीवीपीआई और एमवीपीआई के टोल-फ्री नंबर और जागरूकता पर्चे भी बांटे गए।
21 सितंबर 2026 को पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताएं हुईं। इनके विषय थे "फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से तर्कसंगत दवा उपयोग को सशक्त बनाना: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा के लिए" और "ड्रग-डिवाइस कंबिनेशन उत्पादों (दवा और उपकरण को मिलाकर बने उत्पादों) के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा: मरीज सुरक्षा को सशक्त बनाना"।
फार्माकोविजिलेंस पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर सुश्री प्रियंका (नर्सिंग ऑफिसर, कार्डियोलॉजी आईसीयू, एम्स भोपाल) रहीं। द्वितीय स्थान पर सुश्री परांशी विश्वकर्मा (फार्मेसी की छात्रा, एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, भोपाल) और तृतीय स्थान पर सुश्री प्रिया मीणा (नर्सिंग की छात्रा, बैच 2025, एम्स भोपाल) रहीं। सांत्वना पुरस्कार सुश्री भारती रावत (नर्सिंग ऑफिसर, ऑप्थैल्मोलॉजी ओटी, एम्स भोपाल) और श्री अरशद अली शाह (फार्मेसी के छात्र, ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड रिसर्च, भोपाल) को मिले।
मैटेरियोविजिलेंस पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सुश्री बिनीशा बी. (नर्सिंग ऑफिसर, ऑप्थैल्मोलॉजी ओटी, एम्स भोपाल) और श्री अरशद अली शाह (फार्मेसी के छात्र, ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड रिसर्च, भोपाल) को मिला। द्वितीय स्थान पर सुश्री शिवानी महौर (नर्सिंग ऑफिसर, ऑप्थैल्मोलॉजी ओटी, एम्स भोपाल) और तृतीय स्थान पर सुश्री परांशी विश्वकर्मा (फार्मेसी की छात्रा, एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, भोपाल) रहीं।
विभाग ने निर्णायकों के समय, परिश्रम और विशेषज्ञ मूल्यांकन के लिए उनका हार्दिक आभार जताया। निर्णायक मंडल में डॉ. राजकुमार पाटिल (प्रोफेसर, सीएफएम यानी सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एम्स भोपाल), डॉ. नसीमा शफकत (असिस्टेंट प्रोफेसर, नर्सिंग कॉलेज, एम्स भोपाल), डॉ. जॉन ए. संतोषी (प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स यानी हड्डी रोग विभाग, एम्स भोपाल) और सुश्री लिली पोद्दार (एसोसिएट प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्री रोग नर्सिंग, एम्स भोपाल) शामिल रहीं।
22 सितंबर 2026 को एम्स भोपाल के अस्पताल भवन के विभिन्न ओपीडी प्रतीक्षा क्षेत्रों में उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इसका विषय "प्रतिकूल घटनाओं की सूचना देने का महत्व और तरीके" था। इस दौरान पीवीपीआई की जानकारी देने वाली सामग्री भी बांटी गई।
21, 22 और 23 सितंबर 2026 को भोपाल के एसएएम कॉलेज ऑफ फार्मेसी, जय नारायण कॉलेज ऑफ फार्मेसी और ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड रिसर्च में फार्मेसी विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम हुए। इनमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को फार्माकोविजिलेंस की जानकारी दी गई। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भावी फार्मासिस्टों की सक्रिय भागीदारी से सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देना था।
छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह की सभी गतिविधियों का उद्देश्य दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग, प्रतिकूल घटनाओं की सूचना देने और सही तरीके से सूचना देने के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव (एडीआर) की सूचना देना स्वैच्छिक है। कम सूचना मिलना पूरी दुनिया की चुनौती है। इसलिए ऐसे प्रयास सूचना देने की आदत मजबूत करने और मरीज सुरक्षा तथा जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं।