एम्स भोपाल में मनाया गया विश्व ड्यूशेन जागरूकता दिवस
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एम्स भोपाल में मनाया गया विश्व ड्यूशेन जागरूकता दिवस
मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग और दुर्लभ रोग उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रेयर डिजीज) ने डॉक्टर्स फॉर यू आस्था हेल्प डेस्क टीम तथा संस्थान के विभिन्न विभागों के सहयोग से 07 सितंबर 2026 को "विश्व ड्यूशेन जागरूकता दिवस" मनाया।
• कार्यक्रम का उद्देश्य ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी - एक आनुवंशिक बीमारी जिसमें मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं) के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाना तथा समय पर निदान, बहु-विषयक सहायक देखभाल, संभावित जटिलताओं की समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श के महत्व को रेखांकित करना था, ताकि आगामी गर्भधारण में प्रभावित शिशु के जन्म को रोका जा सके।
• विशेषज्ञ चिकित्सकों ने डीएमडी की प्रारंभिक जांच व प्रबंधन, पुनर्वास की भूमिका तथा हृदय-फेफड़ों की जांच के महत्व पर व्याख्यान दिए और जन-जागरूकता सामग्री का वितरण किया गया।
एम्स भोपाल के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग और दुर्लभ रोग उत्कृष्टता केंद्र ने डॉक्टर्स फॉर यू आस्था हेल्प डेस्क टीम तथा संस्थान के अन्य विभागों के सहयोग से "विश्व ड्यूशेन जागरूकता दिवस" का आयोजन किया। इस वर्ष की थीम "पहुँच बदलती है जिंदगी" रखी गई।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) के बारे में आम जनता और स्वास्थ्यकर्मियों में समझ बढ़ाना था। यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें बच्चों की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं। कार्यक्रम में समय पर निदान, बहु-विषयक सहायक देखभाल, संभावित जटिलताओं की समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया, ताकि परिवारों को भविष्य में होने वाले गर्भधारण में प्रभावित शिशु के जन्म से बचाया जा सके।
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) और शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ शिखा मलिक की गरिमामयी उपस्थिति रही।
दुर्लभ रोग उत्कृष्टता केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ भावना ढींगरा ने एम्स भोपाल में डीएमडी के संदर्भ में चल रही पहलों की जानकारी दी। इनमें एनपीआरडी पंजीकरण (राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत पंजीकरण), बहु-विषयक सहायक और पुनर्वास देखभाल, आनुवंशिक परामर्श, मरीज सहायता सेवाएं तथा दुर्लभ रोग प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ सहयोग शामिल हैं, जिसमें डीएमडी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ पूजा सोनी (वरिष्ठ रेजिडेंट, शिशु रोग विभाग) ने "डीएमडी की प्रारंभिक जांच एवं प्रबंधन" विषय पर प्रस्तुति दी। डॉ विठ्ठल प्रकाश पुरी (सह-प्राध्यापक, फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभाग) ने डीएमडी के प्रबंधन में पुनर्वास की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। वहीं डॉ अंबर कुमार (सह-प्राध्यापक, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग) ने डीएमडी रोगियों के संदर्भ में हृदय-फेफड़ों की जांच (कार्डियोपल्मोनरी स्क्रीनिंग) की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान डीएमडी, इसके प्रबंधन में हो रही हालिया प्रगति और विज्ञान की निरंतर उन्नति से उपलब्ध विकल्पों के बारे में आम जनता और स्वास्थ्यकर्मियों को जागरूक करने के लिए शैक्षणिक सामग्री, पैम्फलेट और जागरूकता पोस्टर भी प्रदर्शित एवं वितरित किए गए।
कार्यक्रम के समापन पर एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया और प्रभावित मरीजों तथा उनके परिवारों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए रोकथाम और समय पर बहु-विषयक देखभाल की आवश्यकता पर बल दिया।