भोपाल

एम्स भोपाल में पांचवां सफल हृदय प्रत्यारोपण, महाराष्ट्र के नासिक निवासी मरीज को मिला नया जीवन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में पांचवां सफल हृदय प्रत्यारोपण, महाराष्ट्र के नासिक निवासी मरीज को मिला नया जीवन

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल ने महाराष्ट्र के नासिक निवासी गंभीर हृदय रोगी का पांचवां सफल हृदय प्रत्यारोपण कर उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

• मरीज के हृदय के धड़कने की क्षमता महज 15 प्रतिशत रह गई थी। मुंबई और नासिक में उपचार के बावजूद राहत न मिलने पर वह एम्स भोपाल पहुंचा, जहां 9 सितंबर 2026 को उसका सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया। अब मरीज की स्थिति में संतोषजनक सुधार है, और अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

• यह जीवनरक्षक प्रत्यारोपण ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित मरीज के परिजनों द्वारा अंगदान की सहमति देने के कारण संभव हो सका, जिसने समाज में अंगदान के महत्व और मानवीय संवेदनाओं का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

• यह उपलब्धि दर्शाती है कि भोपाल अब दूसरे राज्यों के मरीजों के लिए भी उन्नत चिकित्सा सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र बनकर उभर रहा है।

गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए कभी दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों का रुख करने वाले मरीजों के लिए अब भोपाल भी उन्नत चिकित्सा सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। इसी क्रम में संस्थान ने पांचवां हृदय प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा कर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। इस प्रत्यारोपण से महाराष्ट्र के नासिक निवासी एक गंभीर हृदय रोगी को नया जीवन मिला है।

प्रत्यारोपण प्राप्त करने वाले मरीज ने मुंबई और नासिक में उपचार कराया, लेकिन उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। उसकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि दैनिक दिनचर्या के सामान्य कार्य करना भी मुश्किल हो गया था। एक रिश्तेदार की सलाह पर उसने एम्स भोपाल में उपचार कराने का निर्णय लिया। यहां विस्तृत जांच के बाद चिकित्सकों ने पाया कि उसके हृदय के धड़कने की क्षमता महज 15 प्रतिशत रह गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकीय टीम ने हृदय प्रत्यारोपण को उपचार का अंतिम विकल्प बताया।

मरीज ने प्रत्यारोपण के लिए सहमति दी और चिकित्सकों की सलाह पर भोपाल में ही रुक गया। आखिरकार 9 सितंबर 2026 को अस्पताल से फोन आया कि ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित एक मरीज के परिजनों ने अंगदान के लिए सहमति दे दी है। इसके बाद उसका सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के बाद उसे कुछ दिनों तक आईसीयू में चिकित्सकीय टीम की निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे वार्ड में स्थानांतरित किया गया और आगे उपचार एवं देखभाल जारी रही। अब मरीज की स्थिति में संतोषजनक सुधार है और अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

यह हृदय प्रत्यारोपण कार्य एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। प्रत्यारोपण की इस जटिल प्रक्रिया को कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग की विशेषज्ञ टीम ने उच्च दक्षता और समन्वय के साथ अंजाम दिया।

टीम में डॉ. योगेश निवारिया, डॉ. एम. किशन, डॉ. सुरेंद्र यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी, डॉ. आदित्य सिरोही एवं डॉ. अंजलि तिवारी शामिल थे। इसके अतिरिक्त कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. भूषण शाह और डॉ. सुदेश प्रजापति ने भी प्रत्यारोपण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एनेस्थिसियोलॉजी टीम से डॉ.

वैशाली वेंडेस्कर, डॉ. पूजा, डॉ. सुनैना तेजपाल कर्ण तथा डॉ. हरीश ने पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई। वहीं ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दिनेश मीणा ने संपूर्ण प्रत्यारोपण प्रक्रिया के समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। हृदय प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रिया में विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग अधिकारियों, ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू टीम तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के बीच सटीक समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पांचवें सफल हृदय प्रत्यारोपण का संपन्न होना संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञता का प्रमाण है। उन्होंने अंगदान करने वाले परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन परिस्थिति में लिया गया उनका यह निर्णय किसी अन्य व्यक्ति के लिए नया जीवन लेकर आया है। उन्होंने आगे कहा कि एम्स भोपाल अब फेफड़ा प्रत्यारोपण की तैयारी कर रहा है।

मरीज और उसके परिजनों ने अंगदाता परिवार, एम्स भोपाल, मध्य प्रदेश सरकार तथा उपचार में शामिल चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और समस्त स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। जिस व्यक्ति के लिए रोजमर्रा के काम करना भी कठिन हो गया था, वह अब स्वास्थ्य लाभ करके अपने घर लौटने जा रहा है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।