एम्स भोपाल की प्रो. डॉ. भावना शर्मा को नेत्र चिकित्सा में उत्कृष्ट योगदान के लिए बॉम्बे ऑप्थैल्मिक एसोसिएशन का प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक

एम्स भोपाल की प्रो. डॉ. भावना शर्मा को नेत्र चिकित्सा में उत्कृष्ट योगदान के लिए बॉम्बे ऑप्थैल्मिक एसोसिएशन का प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक मुख्य बिंदु:
• एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. भावना शर्मा को नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं, उल्लेखनीय चिकित्सकीय एवं शैक्षणिक योगदान तथा भावी नेत्र चिकित्सकों के मार्गदर्शन के लिए बॉम्बे ऑप्थैल्मिक एसोसिएशन द्वारा प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
• प्रो. डॉ. भावना शर्मा राष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित विशेषज्ञ के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं और उन्होंने बच्चों में आंखों की जटिल सतही एवं पलक संबंधी समस्याओं के आधुनिक उपचार पर अपने अनुभव साझा किए।
• उन्होंने ‘वर्नल केराटोकंजंक्टिवाइटिस के शल्य उपचार’ तथा ‘पलक के किनारे के केराटिनीकरण में श्लेष्मा झिल्ली प्रत्यारोपण’ विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
• यह सम्मान एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग के लिए गर्व का विषय है और मरीजों की बेहतर देखभाल, शिक्षा, शोध, अध्यापन तथा भावी नेत्र चिकित्सकों के मार्गदर्शन के प्रति प्रो. डॉ. भावना शर्मा की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. भावना शर्मा को नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान बॉम्बे ऑप्थैल्मिक एसोसिएशन द्वारा उनकी उत्कृष्ट चिकित्सकीय एवं शैक्षणिक सेवाओं तथा भावी नेत्र चिकित्सकों के मार्गदर्शन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया। प्रो. डॉ. भावना शर्मा राष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित विशेषज्ञ के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आंखों की जटिल सतही समस्याओं और पलकों से जुड़ी बीमारियों के उपचार पर अपने चिकित्सकीय अनुभव और विशेषज्ञ जानकारी साझा की। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों में होने वाली ऐसी समस्याओं के आधुनिक उपचार और शल्य चिकित्सा संबंधी उपायों पर जानकारी दी।
प्रो. डॉ. शर्मा ने ‘वर्नल केराटोकंजंक्टिवाइटिस के शल्य उपचार’ विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। वर्नल केराटोकंजंक्टिवाइटिस मुख्य रूप से बच्चों में होने वाली आंखों की एक एलर्जी संबंधी समस्या है, जिसमें आंखों में खुजली, लालिमा, पानी आना और प्रकाश से परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
उन्होंने इसके गंभीर मामलों में शल्य उपचार की भूमिका और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने ‘पलक के किनारे के केराटिनीकरण में श्लेष्मा झिल्ली प्रत्यारोपण’ विषय पर भी व्याख्यान दिया।
इस प्रक्रिया में शरीर के उपयुक्त हिस्से से स्वस्थ श्लेष्मा झिल्ली लेकर पलक के प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित की जाती है। यह प्रक्रिया पलक के किनारे की गंभीर समस्याओं वाले मरीजों के उपचार में उपयोगी हो सकती है।
प्रो. डॉ. भावना शर्मा ने इन व्याख्यानों के माध्यम से जटिल नेत्र सतह और पलक संबंधी विकारों के उपचार में आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों और अपने चिकित्सकीय अनुभव को साझा किया। इससे देशभर के नेत्र विशेषज्ञों और चिकित्सकों को ऐसे जटिल मामलों के बेहतर प्रबंधन के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
बॉम्बे ऑप्थैल्मिक एसोसिएशन द्वारा दिया गया यह प्रतिष्ठित सम्मान एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान मरीजों की बेहतर देखभाल, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अध्यापन और भावी नेत्र चिकित्सकों के मार्गदर्शन के प्रति प्रो. डॉ. भावना शर्मा की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।