भोपाल

एम्स भोपाल में सातवाँ अंगदान, तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में सातवाँ अंगदान, तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी

मानवता की मिसाल: एम्स भोपाल में सातवाँ अंगदान, तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल में सातवाँ अंगदान पूरा हुआ। यह इस वर्ष का पाँचवाँ अंगदान है।

• नर्मदापुरम की बिलाश टांटी शर्मा (उर्फ शिवानी) 10 अक्टूबर को नवरात्र में माँ सलकनपुर के दर्शन के लिए निकली थीं। रास्ते में सड़क हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई।

• 14 अक्टूबर 2026 को उन्हें ब्रेन-स्टेम डेड घोषित किया गया। अपनों को खोने के असहनीय दुख के बीच बिलाश के परिजनों ने अंगदान का फैसला लिया।

• परिजनों की सहमति और जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद 15 अक्टूबर 2026 को अंगदान पूरा किया गया। एक साधारण ग्रामीण और मजदूर परिवार के इस निर्णय से तीन अन्य परिवारों के जीवन में उम्मीद की किरण पहुँची है।

• बिलाश की एक किडनी एम्स भोपाल में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गई, जबकि दूसरी किडनी और लिवर प्राथमिकता के आधार पर भोपाल के बंसल अस्पताल में प्रत्यारोपित किए गए।

नवरात्र के दौरान माँ सलकनपुर के दर्शन को निकलीं नर्मदापुरम की बिलाश टांटी शर्मा (उर्फ शिवानी) के अंगदान से तीन मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद मिली है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल बिलाश को 14 अक्टूबर को ब्रेन-स्टेम डेड घोषित किया गया, जिसके बाद उनके परिवार ने अंगदान की सहमति दी। यह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में सातवाँ और इस वर्ष का पाँचवाँ अंगदान है।

सुश्री बिलाश नर्मदापुरम जिले की वानखेड़ी तहसील के ग्राम खापा खुर्द की रहने वाली थीं। 10 अक्टूबर 2026 को वे परिवार के साथ नवरात्र के मौके पर माँ सलकनपुर स्थित विजयासन देवी के दर्शन के लिए निकली थीं। इसी दौरान सड़क हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई। परिजन उन्हें इलाज के लिए एम्स भोपाल लेकर पहुँचे, जहाँ चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की। तमाम प्रयासों के बावजूद 14 अक्टूबर 2026 को उन्हें ब्रेन-स्टेम डेड (मस्तिष्क का स्थायी रूप से काम करना बंद कर देना) घोषित कर दिया गया।

अपनों को खोने के असहनीय दुख के बीच बिलाश के परिजनों ने अंगदान का फैसला लिया। एक साधारण ग्रामीण और मजदूर परिवार के इस निर्णय से तीन अन्य परिवारों के जीवन में उम्मीद की किरण पहुँची है।

परिजनों की सहमति और जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद 15 अक्टूबर 2026 को अंगदान पूरा किया गया। बिलाश की एक किडनी एम्स भोपाल में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गई, जबकि दूसरी किडनी और लिवर प्राथमिकता के आधार पर भोपाल के बंसल अस्पताल में प्रत्यारोपित किए गए। इससे तीन मरीजों को जीवन बचाने या बेहतर जीवन पाने का मौका मिला है।

इस पूरी प्रक्रिया में एम्स भोपाल की चिकित्सकीय टीम, संबंधित विभागों और ट्रांसप्लांट समन्वय टीम ने अहम भूमिका निभाई। ब्रेन-स्टेम डेथ की पुष्टि, परिजनों से बातचीत, अंगदान की सहमति, अंगों के आवंटन और प्रत्यारोपण का काम आपसी तालमेल से पूरा किया गया। एम्स भोपाल में लगातार हो रहे अंगदान मध्य प्रदेश में इस नेक काम के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम हैं और गंभीर मरीजों को नई उम्मीद देते हैं।

बिलाश अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों के जरिए दूसरों के जीवन में उम्मीद बनी रहेगी।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।