भोपाल

एम्स भोपाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के सेंटर ऑफ प्रिसिजन मेडिसिन ने ग्लोबल कैंसर कंसोर्टियम के शैक्षणिक सहयोग से तीन दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की। इसे डीएचआर-आईसीएमआर और एएनआरएफ, भारत सरकार ने वित्तपोषित किया।

• कार्यशाला का उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने किया और कार्यशाला हैंडबुक का विमोचन भी किया।

• देशभर के क्लिनिशियन और शोधकर्ताओं को नमूना लेने से लेकर आनुवंशिक आंकड़ों के विश्लेषण और इलाज संबंधी निर्णय तक का प्रशिक्षण मिला।

• टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई, एम्स नई दिल्ली, सीएसआईआर-सीसीएमबी हैदराबाद, क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केंद्र फरीदाबाद, कारकिनोस हेल्थकेयर और डाटार कैंसर जेनेटिक्स लिमिटेड मुंबई के विशेषज्ञों ने योगदान दिया।

• कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों को जीनोमिक जांच के परिणाम समझने और सीधे मरीजों के इलाज में उपयोग करने में सक्षम बनाना है।

मरीजों के इलाज में नवीनतम तकनीक जीनोमिक टेस्टिंग के बेहतर उपयोग के लिए एम्स भोपाल द्वारा देश भर में प्रैक्टिस कर रहे क्लिनिशियन और शोधकर्ताओं के लिये तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को “चिकित्सकों के लिए नेक्स्ट-जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) और बायोइन्फॉर्मेटिक्स: नमूने से लेकर नैदानिक निर्णय तक” विषय पर चरणबद्ध व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। कार्यशाला का उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यशाला हैंडबुक का विमोचन भी किया।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को जीनोमिक परीक्षणों के परिणामों को समझने के साथ ही मरीज की देखभाल में उपयोग करने के लिए आवश्यक तकनीक और कौशल की जानकारी भी दी गयी। यह तकनीक और कौशल चिकित्सकीय प्रैक्टिस में प्रिसीजन मेडिसिन और उपचार में महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला के आयोजन में भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग–भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारत सरकार के अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के साथ समन्वय किया गया। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई, एम्स नई दिल्ली, सीएसआईआर-सीसीएमबी हैदराबाद, रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी, फरीदाबाद, कार्किनोस हेल्थकेयर और डाटर कैंसर जेनेटिक्स लिमिटेड, मुंबई के विशेषज्ञों के साथ ही देश के कई अन्य प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल हुये।

कार्यशाला का संचालन पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. (डॉ.) विवेक एम. रंगनेकर, प्रो. (डॉ.) देबासिस बिस्वास और प्रो. (डॉ.) सैकत दास द्वारा किया गया। कार्यशाला की सफलता में आयोजन सचिव द्वय डॉ. नेहा आर्या और डॉ. जितेंद्र सिंह की विशेष भूमिका रही। कार्यशाला में शामिल हुए प्रतिभागियों और विशेषज्ञों द्वारा इस आयोजन को सराहा गया। ज्ञातव्य है कि सेंटर ऑफ प्रिसीजन मेडिसिन, एम्स भोपाल, मरीजों के श्रेष्ठ इलाज के लिये अत्याधुनिक वैज्ञानिक शोध को दैनिक नैदानिक अभ्यास के लिये क्लिनिशियन को उपलब्ध कराने के लिये लगातार पहल करता रहा है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।