भोपाल

एम्स भोपाल में विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस: इच्छाशक्ति से मिलती है नई जिंदगी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एम्स भोपाल में विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस: इच्छाशक्ति से मिलती है नई जिंदगी

एम्स भोपाल में विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस: इच्छाशक्ति से मिलती है नई जिंदगी

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (पीएमआर) द्वारा 05 सितंबर 2026 को विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस (रीढ़ की हड्डी की चोट जागरूकता दिवस) के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

• मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि), कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल ने पुनर्वास चिकित्सा की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया एवं मजबूत इच्छाशक्ति से जीवन में बड़ी सफलता पाने का प्रेरक उदाहरण साझा किया।

• डॉ. विठ्ठल प्रकाश पुरी, सह-प्राध्यापक, पीएमआर ने स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के कारणों, उपचार तथा दुर्घटना के बाद मरीज को सुरक्षित रूप से उठाने और अस्पताल पहुंचाने के महत्व पर जानकारी दी।

• कार्यक्रम में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से प्रभावित मरीजों ने अपने अनुभव साझा कर चिकित्सकों एवं स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया।

• इस वर्ष का संदेश रहा — "रोकथाम करें, सुरक्षा दें, सशक्त बनाएं – स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से प्रभावित लोगों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण।"

एम्स भोपाल के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (पीएमआर) द्वारा विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस के अवसर पर 05 सितंबर 2026 को एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर होने वाली स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी कहा जाता है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में लकवा या संवेदनशक्ति की कमी हो सकती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि), कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल रहे। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी (डीन एकेडमिक्स एवं कार्यवाहक विभागाध्यक्ष, पीएमआर) तथा डॉ. विठ्ठल प्रकाश पुरी (सह-प्राध्यापक, पीएमआर) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ तथा गणमान्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी ने विभाग द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं की सराहना की। उन्होंने पीएमआर विभाग की सेवाओं एवं मरीजों के उपचार तथा पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए विभाग के समर्पित कार्य की सराहना की।

कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में पुनर्वास चिकित्सा की बढ़ती आवश्यकता एवं प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास चिकित्सा की सेवाएं अत्यंत प्रभावशाली होती हैं तथा नियमित रूप से किए जाने पर ही इसका पूर्ण लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने प्रेरक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि लकवाग्रस्त होने के बाद भी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर व्यक्ति स्वर्ण पदक जीत सकता है, क्योंकि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।

डॉ. विठ्ठल प्रकाश पुरी ने स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने इसके कारणों, उपचार तथा दुर्घटना के बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से उठाने और अस्पताल पहुंचाने के महत्व के बारे में बताया, ताकि चोट को और गंभीर होने से रोका जा सके।

कार्यक्रम में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से प्रभावित मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए तथा पीएमआर विभाग में उपलब्ध उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से हुए सुधार के बारे में बताया। उन्होंने चिकित्सकों एवं स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन श्री मयंक चंदेल, फिजियोथेरेपिस्ट तथा डॉ. हेलेना जाबीन शफीक, जूनियर रेजिडेंट, पीएमआर विभाग द्वारा किया गया।

इस वर्ष का संदेश रहा — "रोकथाम करें, सुरक्षा दें, सशक्त बनाएं – स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से प्रभावित लोगों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण।" कार्यक्रम का उद्देश्य स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की रोकथाम, समय पर उपचार, पुनर्वास तथा प्रभावित व्यक्तियों के सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।