एन. रघुरामन का कॉलम: शालीनता वहां निखरती है, जहां रुतबा नहीं दिखता
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फिल्मों में कुछ भावनात्मक भूमिकाएं ऐसी होती हैं, जो आपकी स्मृति पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं। मेरे लिए तमिल में निर्मित “अन्नै’ (मां) भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल थी। 1962 की इस फिल्म को मैंने शायद 10 साल की उम्र में देखा था। फिल्म एक निःसंतान दम्पती की कहानी पर आधारित थी, जिन्हें [...]
📡 स्रोत: NewsData.io