एन. रघुरामन का कॉलम: टेढ़ा खड़ा रहना कोई गलत नहीं है, लेकिन सही है।
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सबसे पहले उन विज्ञापन जिंगल्स को याद करें, जो ‘टेढ़ा है...’ से शुरू होते थे या वे विज्ञापन, जो ‘...सही है’ पर खत्म होते थे? और कल्पना कीजिए कि जब आप 3 साल के थे तो कैसे आंखें बंद करके एक पैर पर सारस की तरह खड़े होते थे, दूसरा पैर किक मारने के लिए [...]
📡 स्रोत: NewsData.io