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एनआईटी हमीरपुर में तीन दिवसीय शिक्षा महाकुंभ, देशभर से जुटेंगे 50 कुलपति और निदेशक

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एनआईटी हमीरपुर में तीन दिवसीय शिक्षा महाकुंभ, देशभर से जुटेंगे 50 कुलपति और निदेशक

छठे संस्करण की थीम ‘शिक्षा, प्रकृति और प्रगति’, देश-विदेश के शोधार्थी व शिक्षाविद होंगे शामिल

सितंबर 28, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के एनआईटी हमीरपुर में 9 से 11 अक्तूबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के ‘शिक्षा महाकुंभ’ का आयोजन किया जाएगा। एनआईटी हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और आईआईटी मंडी के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन में देशभर के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविद, कुलपति और निदेशक शिक्षा के बदलते स्वरूप तथा भविष्य की चुनौतियों पर मंथन करेंगे।

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने सोमवार को धर्मशाला में विद्या भारती एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित प्रेस वार्ता में महाकुंभ की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि आयोजन में देश के विभिन्न आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों के करीब 50 कुलपति और निदेशक भाग लेंगे।

इस वर्ष महाकुंभ की मुख्य थीम ‘शिक्षा, प्रकृति और प्रगति’ रखी गई है। इसके तहत विकास और प्रकृति के बीच संतुलन तथा शिक्षा की सामाजिक भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रेस वार्ता में विद्या भारती के उत्तर क्षेत्र संगठन सचिव विजय नड्डा, एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. हीरालाल मुरलीधर सूर्यवंशी और मीडिया प्रभारी आरती शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रो. बंसल ने बताया कि देश में अब तक पांच शिक्षा महाकुंभ आयोजित हो चुके हैं। इसकी शुरुआत वर्ष 2023 में एनआईटी जालंधर से हुई थी। इसके बाद एनआईटी कुरुक्षेत्र, एनआईटी श्रीनगर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और पिछले वर्ष नाइपर मोहाली में आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षा महाकुंभ केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि संकल्प और परिवर्तन का माध्यम है।

प्रत्येक आयोजन के बाद ‘थॉट पेपर’ जारी किया जाता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति समेत शिक्षा से जुड़ी नीतियों के निर्माण में उपयोगी सुझाव प्रदान करता है। आयोजन के दौरान 16 मल्टी-ट्रैक कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। इनमें मौलिक विज्ञान, कला-संस्कृति, पारंपरिक चिकित्सा, खेल, कानून सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार अब तक करीब 235 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा मीडिया, वैज्ञानिकों, प्रधानाचार्यों और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से जुड़े विषयों पर आठ विशेष संगोष्ठियां भी होंगी। शिक्षा महाकुंभ में विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और नवाचार प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

स्टार्टअप आइडिया को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को उद्योग जगत से जोड़कर मेंटरशिप उपलब्ध करवाने की पहल भी की जाएगी। इस बार कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों में शोध और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए ‘शोधांकुर’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को लेखन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और चयनित लेखों को पत्रिका में प्रकाशित किया जाएगा।

गणित, अंग्रेजी और तकनीक पर आधारित ‘तेजस’ ओलंपियाड भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचनाएं एकत्र करना और परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा को ज्ञान से कौशल, कौशल से नवाचार, नवाचार से समाज और विकास को प्रकृति से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को ज्ञान से प्रज्ञा, प्रज्ञा से कर्म और कर्म से राष्ट्र निर्माण की दिशा में ले जाना आवश्यक है।

उन्होंने उच्च शिक्षा के मूल्यांकन के मौजूदा मानकों पर भी चर्चा की। प्रो. बंसल ने कहा कि केवल सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत तक पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के वास्तविक सशक्तिकरण पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने विकास को केवल सकल घरेलू उत्पाद से मापने के बजाय समाज की खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता को भी महत्व देने की आवश्यकता बताई।

प्रो. बंसल ने बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय ने स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच की दूरी कम करने के लिए स्कूलों को गोद लेने तथा ‘लैब टू लैंड’ जैसी पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य शोध और ज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों और समाज तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थी के मस्तिष्क के साथ उसके हृदय को भी स्पर्श करे।

विद्यार्थियों में अंधी प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की भावना विकसित करना और उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करना शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।

बाईट: प्रो. सत प्रकाश बंसल, कुलपति, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।