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एटा में मृत महिला के नाम पर फर्जी बीमा पॉलिसी:मौत के एक महीने बाद कराई, कंपनी ने दर्ज कराई FIR

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एटा में मृत महिला के नाम पर फर्जी बीमा पॉलिसी:मौत के एक महीने बाद कराई, कंपनी ने दर्ज कराई FIR

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला सामने आया है। यहां एक मृत महिला के नाम पर उसकी मौत के करीब एक महीने बाद फर्जी जीवन बीमा पॉलिसी कराई गई। इसके बाद, बीमा कंपनी को गुमराह कर मृत्यु की गलत तारीख दिखाकर 10.78 लाख रुपये का क्लेम भी ले लिया गया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर बंधन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि गौरव रावत ने जलेसर थाने में FIR दर्ज कराई है।

बंधन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि गौरव रावत की शिकायत के मुताबिक, जलेसर के बड़े मियां दरवाजा रोड की अनीता देवी के नाम पर 22 अक्तूबर 2024 को 10,78,245 रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी जारी की गई थी। पॉलिसी के आवेदन पत्र में अनीता देवी को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया था। उसमें साफ लिखा था कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है, उनका कोई इलाज नहीं चल रहा है, और न ही वह किसी अस्पताल में भर्ती या नियमित दवा ले रही थीं।

महिला की मौत के बाद जब नामांकित व्यक्ति ने बीमा राशि के लिए क्लेम किया, तो कंपनी ने नियमों के तहत मामले की जांच कराई। इस जांच में जो सच्चाई सामने आई, उससे कंपनी के अधिकारी हैरान थे। जांच में पता चला कि अनीता देवी पॉलिसी जारी होने से करीब तीन-चार महीने पहले से ही मासिक धर्म में ज्यादा खून बहने की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं।

इलाज के लिए उन्हें जलेसर के सरकारी अस्पताल और एक प्राइवेट नर्सिंग होम भी ले जाया गया था। हालांकि, सांठगांठ के कारण नर्सिंग होम में उनके नाम का कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं रखा गया था। मौत के बाद पॉलिसी सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि महिला की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, लेकिन नामांकित व्यक्ति ने दस्तावेजों में हेरफेर करके मौत की तारीख को बदल दिया ताकि पॉलिसी को वैध दिखाया जा सके।

पुलिस जांच शुरूबीमा कंपनी के प्रतिनिधि ने पुलिस को बताया कि नामांकित व्यक्ति ने जानबूझकर तथ्यों को छुपाया, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और कंपनी के साथ धोखाधड़ी कर ₹10.78 लाख की रकम हड़प ली। पुलिस ने गौरव रावत की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और इस धोखाधड़ी में शामिल मुख्य आरोपी व मददगारों की तलाश शुरू कर दी है।

इस पूरे मामले में सी ओ जलेसर ज्ञानेंद्र प्रात सिंह ने बताया कि धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बंधन इंश्योरेंस के प्रतिनिधि द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। वही दूसरा मामला भी जलेसर तहसील का है जहां इंश्योरेंस कंपनी के साथ फर्जीवाड़ा कर बीमा पॉलिसी की रकम हड़पने काएक और मामला सामने आया है।

जलेसर में बीमा फर्जीवाड़ा कर मृत्यु के बाद कराई 12 लाख के क्लेम घोटाले में FIR दर्ज कराई गई है। जलेसर में एक व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद फर्जी तरीके से उसकी जीवन बीमा पॉलिसी कराई गई और । फिर लाखों रुपये का मृत्यु दावा (क्लेम) ठगने का प्रयास किया गया। इस मामले में बंधन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकृत क्रशर (क्लेम) मैनेजर की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

शिकायत के अनुसार, जलेसर के ग्राम मुसियार मकान संख्या 45 की निवासी श्रीमती संगीता कुमारी ने अपने स्वर्गीय पति तहसीलदार पुत्र रामकिशन के नाम पर 12 लाख की बीमा राशि का डेथ क्लेम इंश्योरेंस कंपनी में किया था। दस्तावेजों में दर्शाया गया था कि जीवन बीमित (तहसीलदार) की मृत्यु 29 जनवरी 2025 को हार्ट फेल के कारण हुई थी।

बंधन इंश्योरेंस कंपनी ने इस बड़े क्लेम की आंतरिक जांच कराई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। तकनीकी और स्थानीय जांच से पता चला कि जीवन बीमित तहसीलदार की मृत्यु असल में 29 दिसंबर 2024 से भी पहले हो चुकी थी। जालसाजी की नीयत से, व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके बीमा पॉलिसी ली गई।

इसके बाद झूठी तारीख (29/01/25) दिखाकर 12 लाख हड़पने के लिए मृत्यु दावा फॉर्म जमा किया गया। इस गंभीर जालसाजी का पर्दाफाश होने के बाद, कंपनी के अधिकारियों की सूचना पर पुलिस ने आरोपी संगीता कुमारी के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

इस घटना से स्पष्ट है कि धोखाधड़ी से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि समाज में विश्वास भी टूटता है। यदि किसी को धोखाधड़ी का सामना करना पड़े, तो तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग से संपर्क करें और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें। समाज में पारदर्शिता और जागरूकता बढ़ाने के लिए हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए, ताकि ऐसी घोटाले फिर कभी न हों।

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