Exclusive: 'हिटलर को दे दिया था जवाब...', बेटे अशोक ध्यानचंद ने सुनाए हॉकी के जादूगर के किस्से

National Sports Day 2026: आज यानी 29 अगस्त को देशभर में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है. यह दिन भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी और 'हॉकी के जादूगर' कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.
इस खास मौके पर एबीपी न्यूज कंसल्टेंट रवीश बिष्ट ने मेजर ध्यानचंद के बेटे और विश्व कप विजेता भारतीय हॉकी खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद से खास बातचीत की. इस दौरान अशोक ध्यानचंद ने अपने पिता से जुड़े कई दिलचस्प किस्से शेयर किए. उन्होंने यह भी बताया कि मेजर ध्यानचंद खुद नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे हॉकी को करियर बनाएं.
इसके अलावा उन्होंने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर भी अपनी बात रखी. पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश. सवाल: आज मेजर ध्यानचंद की जयंती है. इस मौके पर आप उन्हें किस तरह याद कर रहे हैं?
अशोक ध्यानचंद: मेजर ध्यानचंद एक ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने हमारे देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में हॉकी को एक अलग पहचान दिलाई. 1928 के ओलंपिक में उन्होंने जो करिश्मा किया, उसके बाद पूरी दुनिया में हॉकी काफी लोकप्रिय हुई.
भारत में हॉकी की लोकप्रियता को एक अलग मुकाम तक पहुंचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान था. भारत ने ओलंपिक हॉकी में आठ गोल्ड मेडल जीते. मेजर ध्यानचंद का भारतीय हॉकी के उस स्वर्णिम दौर में बहुत बड़ा योगदान रहा.
वह फौज में एक सिपाही थे और वहां से आगे बढ़ते हुए 'हॉकी के जादूगर' बने, मेजर बने और फिर पूरी दुनिया उन्हें मेजर ध्यानचंद के नाम से जानने लगी. सवाल: इतने महान हॉकी खिलाड़ी के बेटे होने के बाद क्या आपका हॉकी खेलना पहले से तय था?
अशोक ध्यानचंद: असल में मेरे पिताजी कभी नहीं चाहते थे कि हम लोग हॉकी खेलें. उनका मानना था कि हम पढ़ाई-लिखाई पर ज्यादा ध्यान दें. उस दौर में हॉकी खेलकर आर्थिक रूप से उतनी संपन्नता हासिल नहीं की जा सकती थी, जितनी एक अच्छी नौकरी से हो सकती थी.
इसलिए वह नहीं चाहते थे कि हम हॉकी को अपना करियर बनाएं, लेकिन हमारे अंदर भी हॉकी को लेकर जुनून था. आखिर हम ध्यानचंद के बेटे थे. हमने ट्रेनिंग शुरू की,
📡 स्रोत: ABP Live Khel