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Explained: अर्नब और मुरासु के बाद कतार में कितने तूफान? क्या सर्दियों में ठंड बढ़ेगी या घटेगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explained: अर्नब और मुरासु के बाद कतार में कितने तूफान? क्या सर्दियों में ठंड बढ़ेगी या घटेगी

चक्रवात 'मुरासु' का असर अब कम होने लगा है.

आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद यह कमजोर पड़ रहा है, लेकिन पीछे भारी बारिश, उखड़े पेड़ और बिजली के खंभों की तबाही छोड़ गया है. एक हफ्ते के अंदर यह दूसरा तूफान था यानी पहले 'अर्नब' और अब 'मुरासु'.

तो क्या 2026 खत्म होने से पहले भारत को और तूफान झेलने पड़ेंगे और सर्दियों की ठिठुरन पर इसका कितना असर पड़ेगा...

अर्नब, मुरासु... और कितने बाकी?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 2026 में अब तक सिर्फ दो सिस्टम ही 'साइक्लोनिक स्टॉर्म' के लेवल तक पहुंच पाए हैं.

अक्टूबर 2026 के आखिर में अर्नब और नवंबर 2026 की शुरुआत में मुरासु.

यानी, तूफानों के नामों की लिस्ट में कई नाम बचे हैं, लेकिन हर नाम का इस्तेमाल तभी होता है जब कोई सिस्टम पहले 'साइक्लोनिक स्टॉर्म' बने. यानी हवा की रफ्तार 62 किमी प्रति घंटा से ज्यादा होनी चाहिए.

'मुरासु' के बाद लिस्ट में अगला नाम 'अकवान' है, जो ईरान ने दिया है. इसके बाद 'कानी' मालदीव से, फिर 'नगामान' म्यांमार से आएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या दिसंबर तक ये नाम इस्तेमाल होंगे?

दिसंबर तक कितने और तूफान आ सकते हैं?

यहां एक जरूरी बात समझिए कि नामों की लिस्ट कोई 'शेड्यूल' नहीं है.

IMD हर साल औसतन 4-5 साइक्लोन की बात करता है, जिसमें से 3-4 अक्टूबर से दिसंबर के बीच बनते हैं. इस साल एक बड़ा फैक्टर काम कर रहा है- मजबूत एल नीनो.

IMD के मुताबिक, एल नीनो की वजह से इस साल बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में सिस्टम कम बन रहे हैं और उनकी ट्रैक भी छोटी रह रही है.

इस वजह से पूरे सीजन यानी दिसंबर तक एक-दो और सिस्टम बन सकते हैं, लेकिन यह गारंटी नहीं है कि वे सभी साइक्लोन बनेंगे. कुछ सिर्फ 'डिप्रेशन' या 'डीप डिप्रेशन' तक सीमित रह सकते हैं.

यानी, लिस्ट में नाम बहुत हैं, लेकिन इस साल के आखिर तक शायद ही कोई और बड़ा तूफान भारत की मुख्यभूमि से टकराए.

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📡 स्रोत: ABP Live

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