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Explained: दवा की कीमत तय होने से लूट तक पूरा खेल! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदलेगा?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explained: दवा की कीमत तय होने से लूट तक पूरा खेल! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदलेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को दवा कंपनियों और अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर सीधा सवाल उठाया है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि जब एक कैंसर की दवा खुदरा विक्रेता को 2,700 रुपए में दी जाती है, लेकिन मरीज से 27,000 रुपए वसूले जाते हैं, तो यह सिर्फ मुनाफा नहीं, 'कत्लेआम' है.

अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 में 16 प्रतिशत खुदरा मार्जिन तय है, तो इसे हर दवा पर लागू क्यों नहीं किया जाता. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से दो हफ्ते का समय मांगा है.

अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी. तो इससे पहले समझ लें कैसे तय होती हैं दवा की कीमतें और लूट के तरीके क्या हैं...

दवा की कीमतें तय कैसे होती हैं?

भारत में दवाओं की कीमतें दो हिस्सों में बंटी हैं:

शेड्यूल्ड दवाएं: ये वो दवाएं हैं जो नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) में शामिल हैं. इनकी कीमत नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) तय करती है.

NPPA बाजार में मौजूद उन सभी ब्रांड्स की औसत कीमत निकालती है जिनकी मार्केट शेयर 1 प्रतिशत या ज्यादा है और उसमें 16 प्रतिशत खुदरा मार्जिन जोड़कर सीलिंग प्राइस तय करती है.

जुलाई 2026 तक NPPA ने 935 फॉर्मूलेशन्स की सीलिंग प्राइस तय कर रखी है. NLEM 2022 में 388 दवाएं शामिल हैं.

नॉन-शेड्यूल्ड दवाएं: ये वो दवाएं हैं जो इस लिस्ट से बाहर हैं. इनकी शुरुआती कीमत कंपनी खुद तय करती है.

सरकार सिर्फ इतना कंट्रोल रखती है कि कंपनी एक साल में MRP में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सकती. यहीं सबसे बड़ा खेल है.

लूट कहां और कैसे हो रही है?

नॉन-शेड्यूल्ड दवाएं भारत के फार्मा मार्केट की बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं. इनमें कंपनी अपनी मर्जी से कीमत तय कर सकती है.

संसद की स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक आम एंटीहिस्टामिन गोली जिसकी MRP 21 रुपए है, वो स्टॉकिस्ट को

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

दवा की कीमत तय होने से लूट तक पूरा खेल! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदलेगा? इस खबर में सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों और अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर सवाल उठाया है, खासकर कैंसर दवाओं के अत्यधिक मूल्य वृद्धि को ‘कत्लेआम’ कहा है। यह विषय दवा मूल्य नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवा की लागत पर केंद्रित है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए कानूनी दिशा-निर्देश तय कर सकती है, जिससे दवा की कीमतें नियंत्रित हो सकती हैं। आम जनता पर इसका असर दवाओं की लागत म

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