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Explained: फॉर्म 6 से जुड़ा विवाद क्या? SC के बयान के बाद विपक्ष हमलावर, EC ने दी सफाई

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explained: फॉर्म 6 से जुड़ा विवाद क्या? SC के बयान के बाद विपक्ष हमलावर, EC ने दी सफाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ किया कि उसने 'फॉर्म 6' में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी.

सुप्रीम कोर्ट के इस बयान के बाद इलेक्शन कमिशन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर विवादों में हैं.

दरअसल फॉर्म 6 वह कानूनी फॉर्म है जिसका इस्तेमाल नागरिक वोटर के तौर पर रजिस्टर करने के लिए करते हैं.

कोर्ट ने चुनाव आयोग के ECINet/ERONet पोर्टल पर इस फॉर्म में किए गए कथित बदलावों को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह बात कही.

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान कहा, हमने किसी भी बदले हुए 'फॉर्म 6' को मंजूरी नहीं दी है. यह बात साफ होनी चाहिए.

जब ​​रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि उसमें बदलाव किसने किया है.

CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी.

मोहना की बेंच, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें 'फॉर्म 6' के ऑनलाइन वर्जन में कथित बदलावों को चुनौती दी गई थी.

इन बदलावों में आवेदक के पूर्वजों से जुड़ी जानकारी और वोटर लिस्ट के पिछले 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) से जुड़े घोषणा-पत्र जैसी जरूरतें शामिल थीं.

शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने दिल्ली में SIR के तरीके का जिक्र किया और आरोप लगाया कि वोटर-रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में दो अतिरिक्त शर्तें जोड़ी गई थीं.

यह टिप्पणी चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया से जुड़े फैसले लेने के तरीके पर चल रही बहस के बीच आई है.

फॉर्म 6 से जुड़ा विवाद क्या है?

फॉर्म 6 वह कानूनी आवेदन है जिसका इस्तेमाल कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए करता है.

यह विवाद एक अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा है जिसे चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म के ऑनलाइन वर्जन में जोड़ा गया था.

जुलाई में फॉर्म 6 के ऑनलाइन वर्जन में बदलाव करके एक नया सेक्शन जोड़ा गया.

इसमें आवेदकों को यह बताना ज़रूरी था कि क्या उनका अ

📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

फॉर्म 6 वह प्रपत्र है जिसके द्वारा नागरिक वोटर के रूप में पंजीकरण करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि उसने इस फॉर्म में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी, जिससे इलेक्शन कमिशन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच विवाद फिर से भड़क गया। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि फॉर्म 6 का उपयोग चुनावी पंजीकरण के लिए अनिवार्य है और किसी भी बदलाव से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। यदि बदलाव के दावे गलत साबित होते हैं, तो मतदाता अपनी पंजीकरण प्रक्रिया में अनिश्चितता और

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