Explained: क्या मौत के डर से रेप रुकता है? डेथ पेनाल्टी वाले देशों में नतीजे कितने कारगर
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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मौत की सजा सिर्फ उन मामलों में दी जा सकती है जहां अपराधी के सुधरने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो चुकी हो.
कोर्ट ने कहा कि अपराध की भयावहता भर से यह नहीं मान लिया जा सकता कि आरोपी सुधर नहीं सकता.
इसी फैसले में कोर्ट ने 6 साल की सौतेली बेटी के रेप-मर्डर के दोषी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, लेकिन उसे बाकी जीवन बिना रिहाई के जेल में रखने का आदेश दिया.
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब देश में रेप जैसे जघन्य अपराधों पर सख्त सजा की मांग फिर तेज हो गई है. क्या मौत की सजा के डर से रेप रुकेगा और दुनियाभर के आंकड़े क्या कहते हैं...
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि मौत की सजा तभी जायज है जब उम्रकैद भी 'पूरी तरह असंभव' साबित हो जाए.
कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाने से पहले अलग से सुनवाई नहीं की, जो प्रक्रिया की गलती थी. यानी कोर्ट का रुख यह है कि हर जघन्य अपराध में फांसी नहीं दी जा सकती.
अपराधी के सुधरने की संभावना को भी देखना जरूरी है.
इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने गैंगरेप और मर्डर के एक मामले में मौत की सजा बरकरार भी रखी है, यह कहते हुए कि ऐसे जघन्य अपराधों में फांसी ही सही सजा है.
यानी कोर्ट हर मामले को अलग-अलग तरीके से देख रहा है.
जिन देशों में मौत की सजा, वहां रेप रेट क्या है?
दुनिया में कम से कम 25 देशों में रेप या रेप-मर्डर पर मौत की सजा का प्रावधान है.
इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ईरान, इराक, चीन, मिस्र और नाइजीरिया जैसे देश शामिल हैं. लेकिन सवाल यह है क्या इन देशों में रेप की दर कम है?
आंकड़े उलटी तस्वीर दिखाते हैं.
UNODC और UNICEF के 2019-2024 के डेटा के मुताबिक, जिन देशों में रेप पर मौत की सजा है, वहां चाइल्ड अब्यूज या रेप की दर उन देशों से कम नहीं है जहां मौत की सजा नहीं है.
पाकिस्तान में 2023 में 7,010 रेप केस दर्ज हुए, लेकिन कन्विक्शन रेट 3% से भी कम रहा.
सऊदी अरब में रिपोर्टेड रेप रेट 0.09 प्रति लाख है
📡 स्रोत: ABP Live