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Explainer: भयंकर सूखे ने ब्राजील में लौटाई मौत की बीमारी, 73 साल बाद शहरों में कैसे लौटा 'येलो फीवर'?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explainer: भयंकर सूखे ने ब्राजील में लौटाई मौत की बीमारी, 73 साल बाद शहरों में कैसे लौटा 'येलो फीवर'?

Brazilian Yellow Fever: आमतौर पर हम यही मानते हैं कि बारिश के मौसम में जलभराव के कारण मच्छर पनपते हैं और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि बारिश की कमी यानी 'सूखा' भी किसी भयानक महामारी का कारण बन सकता है? 'साइंस एडवांसेस' जर्नल की एक हालिया रिसर्च ने एक ऐसा ही चौंकाने वाला खुलासा किया है. यह कहानी है ब्राजील की, जहां एक भयंकर सूखे ने जंगल की एक जानलेवा बीमारी को इंसानी बस्तियों तक पहुंचा दिया. अचानक फैला मौत का साया साल 2016 से 2019 के बीच ब्राज़ील के शहरों में अचानक 'येलो फीवर' (पीला बुखार) के मामले तेजी से बढ़ने लगे. हालात इतने बिगड़ गए कि करीब 2,000 लोग इस खतरनाक बुखार की चपेट में आ गए और लगभग 750 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. सरकार और स्वास्थ्य विभाग इसलिए हैरान थे क्योंकि शहरों से इस बीमारी को 1942 में ही वैक्सीन और दवाओं के जरिए खत्म किया जा चुका था. ऐसे में 73 साल बाद यह बीमारी वापस शहरों में कैसे आ गई? जब स्टैनफोर्ड और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसकी गहराई से जांच की, तो एक खौफनाक सच सामने आया. ये भी पढ़ें: होर्मुज को लेकर ट्रंप ने अब इस देश को दी धमकी, कहा- 'बीच में आया तो बमबारी से कर देंगे तबाह' बीमारी की असल जड़: 2015 का ऐतिहासिक सूखा रिसर्च में पता चला कि इस पूरी तबाही के पीछे साल 2015 में पड़ा सदी का सबसे भयानक सूखा था. 'अल नीनो' के प्रभाव के कारण ब्राजील और दक्षिण अमेरिका के जंगलों में पानी के छोटे-बड़े स्रोत और नदियां पूरी तरह सूख गई थीं. इसी सूखे ने एक ऐसी चेन रिएक्शन शुरू की, जिसने जंगल के मच्छरों को शहरों तक पहुंचा दिया. पानी और खाने की तलाश में जंगल में रहने वाले बंदर (विशेषकर हाउलर और मारमोसेट बंदर) शहरों की तरफ भागने लगे. इनमें से कई बंदर पहले से ही येलो फीवर के वायरस से संक्रमित थे. येलो फीवर फैलाने वाले 'हेमागोगस' (Haemagogus) नाम के मच्छर भी पानी की कमी से बेहाल थे. खुद को जिंदा रखने और नमी पाने के लिए इन मच्छरों ने जंगल के जानवरों का खून ज्यादा तेजी से चूसना शुरू कर दिया. जब बंदर खाने की तलाश में शहरों में पहुँचे, तो ये संक्रमित मच्छर भी उनके साथ इंसानी बस्तियों में आ गए. इसके बाद इन मच्छरों ने इंसानों को अपना शिकार बनाना शुरू किया और दशकों बाद शहरों में येलो फीवर की वापसी हो गई. ये भी पढ़ें: Breaking News Today Live Updates: खनिज संशोधन विधेयक पर निशिकांत दुबे का हमला, बोले- झारखंड सरकार को नहीं मिलेगा रॉयल्टी और सेस वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बाद में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन और मच्छरों को मारने की मुहिम चलाकर इस प्रकोप को तो रोक लिया गया, लेकिन इसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है. इस घटना ने साबित कर दिया है कि मौसम में होने वाले बड़े बदलाव सिर्फ हमारी खेती या पानी के लिए ही खतरा नहीं हैं, बल्कि ये जानवरों के व्यवहार को बदलकर नई बीमारियों को सीधे हमारे घरों तक ला सकते हैं. विशेषज्ञों को डर है कि आने वाले समय में जब भी भयंकर सूखा पड़ेगा, जंगल के जीव शहरों की तरफ भागेंगे और ऐसी ही कोई छिपी हुई बीमारी फिर से इंसानों के लिए काल बन सकती है. ये भी पढ़ें: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, निर्माण गुणवत्ता पर फिर उठे गंभीर सवाल, पुल में आईं गहरी दरारें ये भी पढ़ें: 'भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमसे पूछा कि...' ट्रंप ने क्यों लिया CEC का नाम?

📡 स्रोत: NewsData.io

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