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Explainer: चीन के साथ सीमा विवाद में 'डिलिमिटेशन' पर चर्चा, 3488 किलोमीटर लंबे LAC के सटीक निर्धारण पर फंसा पेंच

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 27 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explainer: चीन के साथ सीमा विवाद में 'डिलिमिटेशन' पर चर्चा, 3488 किलोमीटर लंबे LAC के सटीक निर्धारण पर फंसा पेंच

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेनटेटिव (SR) वार्ता मंगलवार को यानि 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में हुई. NSA अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की बातचीत में पहली बार बाउंड्री Delimitation यानी सीमा के सटीक निर्धारण पर आगे बढ़ने पर जोर दिया गया.

दोनों देशों ने इसके लिए एक्पर्ट ग्रुप और बॉर्डर मैनेजमेंट के लिए वर्किंग ग्रुप को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है. सबसे बड़ा पेंच क्या है? भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबा LAC मौजूद है.

मगर दोनों देशों के बीच इसकी पूरी तरह साझा और स्वीकृत रेखा मौजूद नहीं है. भारत LAC की लंबाई करीब 3,488 किमी मानता है. वहीं चीन की गणना करीब 2,000 किमी की है. यही अंतर सीमा पर विवाद का मूल कारण है. कई इलाकों में दोनों देशों की LAC को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं.

इसलिए जिस जमीन को भारत अपनी तरफ मानता है, वहां चीन की सेना की मौजूदगी या गश्त भारत के लिए अतिक्रमण मानी जा सकती है, जबकि चीन उसे अपनी धारणा वाली LAC के भीतर मान सकता है. LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा में क्या अंतर है? LAC कोई अंतिम अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है. यह वह रेखा है जहां तक दोनों देशों का वास्तविक नियंत्रण है.

दूसरी ओर Boundary Delimitation का मतलब दोनों देशों के बीच सीमा की राजनीतिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य रेखा तय करना है. सरल शब्दों में समझे अर्थ LAC-अभी जमीन पर किसका नियंत्रण है. Delimitation - भविष्य में दोनों देशों के बीच सीमा कहां होगी.

भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि पूरी LAC की कोई साझा delineation नहीं हुई है. दोनों देशों की पूरी LAC को लेकर आम धारणा नहीं है. आखिर 3,488 किमी की LAC तय क्यों नहीं हो पाई? इसके पीछे कई कारण हैं 1. दोनों देशों के अलग-अलग सीमा दावे: भारत और चीन सीमा के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग क्षेत्रों पर दावा करते हैं.

खासतौर पर पश्चिमी सेक्टर यानी लद्दाख और पूर्वी सेक्टर यानी अरुणाचल प्रदेश में मतभेद काफी गंभीर हैं. 2. ऐतिहासिक नक्शों की अलग व्याख्या: भारत सीमा निर्धारण के लिए ऐतिहासिक समझौतों, परंपरागत सीमा और भौगोलिक सिद्धांतों को आधार मानता है. चीन की सीमा संबंधी व्याख्या अलग है.

भारत सरकार के अनुसार चीन पारंपरिक और प्रचलित सीमा-संरेखण को स्वीकार नहीं करता. 3. LAC को लेकर अलग-अलग धारणा: 1990 के दशक में दोनों देशों ने LAC की clarification और confirmation की प्रक्रिया शुरू की थी. कुछ क्षेत्रों में दोनों पक्षों ने अपनी धारणा वाले नक्शे साझा भी किए है. मगर यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकी. 4.

जमीन पर बदलते हालात: हिमालयी क्षेत्र में ऊंचे पहाड़, दर्रे, नदियां और दुर्गम भूगोल सीमा को जमीन पर स्पष्ट रूप से चिह्नित करना मुश्किल बनाते हैं. ऐसे में किसी पहाड़ी रिज, नदी या watershed को सीमा मानने को लेकर भी मतभेद हो सकते हैं.

डिलिमिटेशन पर अभी क्या सहमति बनी है? 25 अगस्त की वार्ता के बाद दोनों देशों ने आठ सूत्रीय सहमति में कहा कि Boundary Delimitation के Expert Group और Border Management Working Group अलग-अलग स्तर पर काम को आगे बढ़ाएंगे. दोनों समूहों का पहला काम अपने-अपने टर्म आफ रिफ्रेंस पर सहमति बनाना होगा.

इसके अलावा दोनों देशों ने LAC को बेहतर समझने वाले कुछ क्षेत्रों में काम करने,अतिरिक्त सैन्य बैठक बिंदु बनाने और पूर्वी तथा मध्य सेक्टर में दो अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन को स्थापित करने पर सहमति जताई. क्या भारत-चीन सीमा अब तय होगी? अभी ऐसा कहना जल्दबाजी मानी जाएगी.

यह महत्वपूर्ण जरूर है क्योंकि बातचीत अब केवल सैनिकों की वापसी या तनाव कम करने तक सीमित नहीं है. यह सीमा के निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हो रही है.

मगर वास्तविक सीमा तय करने के लिए दोनों देशों को यह तय करना होगा कि अलग-अलग सेक्टरों में सीमा की रेखा कहां होनी है. दोनों पक्ष उसे राजनीतिक रूप से स्वीकार करेंगे या नहीं. चीन और भारत अभी भी सीमा विवाद के अंतिम समाधान की तलाश में हैं.

दोनों पक्षों ने 2005 के Political Parameters and Guiding Principles के तहत निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई है.

गलवान विवाद के बाद बड़ा दावा 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन के रिश्तों में काफी समय तक तनाव रहा. 2024 के बाद सैन्य डिसइंगेजमेंट और सीमा पर शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम है. अब 2026 की SR वार्ता में delimitation को आगे बढ़ाने की बात सामने आना बातचीत के एजेंडे के अगले चरण की ओर बड़ा संकेत है.

हालांकि, LAC की स्पष्टता और अंतिम अंतरराष्ट्रीय सीमा का तय करना करना दो अलग प्रक्रियाएं हैं. इसलिए 3,488 किमी की पूरी सीमा को लेकर सहमति बनने में अभी लंबी कूटनीतिक की जरूरत है. ये भी पढ़ें: Nepal Flood Update: नेपाल की तबाही पर Exclusive Ground Report, जानिए अब कैसे हैं वहां के हालात?

📡 स्रोत: NewsData.io

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