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Explainer: गलवान झड़प के 7 साल बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राजनयिक संबंध या ट्रेड संबंध सुधरेंगे या पूरी होगी महज औपचारिकता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explainer: गलवान झड़प के 7 साल बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राजनयिक संबंध या ट्रेड संबंध सुधरेंगे या पूरी होगी महज औपचारिकता

India-China Relations: भारत एक बार फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहा है.

नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है. मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस आयोजन पर हैं.

इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा तय हो गया है. इससे समिट की हलचल तेज हो गई हैं. गलवान झड़प के 7 साल हो चुके हैं. तब से अब पहली बार शी जिनपिंग भारत दौरे पर आ रहे हैं.

आइए समझते हैं कि इससे दौरे से भारत से राजनायिक संबंध सुधरेंगे और ट्रेड संबंधों की कुछ फायदा मिलेगा.

नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शनिवार को BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंचने वाले हैं. सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक होगी.

यह मुलाकात भारत मंडपम में हो सकती है. 7 साल बाद होगी बैठक पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारतीय जमीन पर करीब सात साल बाद यह पहली द्विपक्षीय बैठक होगी.

खास बात यह है कि 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद दोनों नेताओं की भारत में यह पहली द्विपक्षीय मुलाकात होगी. ऐसे में इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई दिल्ली यात्रा से भारत और चीन के बीच राजनयिक रिश्तों में सुधार की उम्मीद है. यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी.

हालांकि, अभी तक ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में भी बड़ा सुधार होने वाला है.

यह भी पढ़ें: भारत मंडपम में 12-13 को लगेगा वैश्विक नेताओं का जमावड़ा, जानें इसका पूरा शेड्यूल मुलाकात से रिश्ते नए लेकिन कारोबार की राह में चुनौती शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच बने तनाव को कम करने और उच्च स्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाने में यह बैठक मदद कर सकती है.

हालांकि, राजनयिक स्तर पर नरमी के संकेतों के बावजूद व्यापारिक रिश्तों में तुरंत बड़े बदलाव की संभावना कम है.

चीन के साथ कारोबार में वीजा में देरी, निवेश पर कड़े नियम और तकनीकी उपकरणों की आवाजाही जैसी अड़चनें अब भी बनी हुई हैं.

सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और बुनियादी ढांचे से जुड़े उपकरणों के अलावा टनल बोरिंग मशीनों की सप्लाई में भी रुकावटें सामने आती रही हैं.

ऐसे में मोदी-शी की बैठक से कुछ खास व्यापारिक और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का रास्ता जरूर खुल सकता है, लेकिन दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों में भरोसा बहाल होने और बड़े बदलाव के लिए अभी लंबी प्रक्रिया की जरूरत होगी.

कौन से मुद्दों पर बन सकती है बात?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत और चीन की कंपनियों के सामने अभी भी कई मुश्किलें हैं.

इनमें निवेश से जुड़े नियम, वीजा मिलने में देरी और औद्योगिक उपकरणों पर प्रतिबंध जैसी समस्याएं शामिल हैं.

इससे साफ है कि दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों में सुधार और आर्थिक संबंधों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है. नया नहीं, 1962 से है तनाव भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध हुआ था.

इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना रहा. 2020 में सीमा पर हुई झड़प में 20 भारतीय और चार चीनी सैनिकों की मौत के बाद तनाव और बढ़ गया था.

हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ सुधार देखने को मिला है.

पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा और अमेरिका के साथ दोनों देशों के अस्थिर संबंधों के बीच यह सुधार और महत्वपूर्ण हो गया है. दौरे से पहले क्या बोला चीन?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शंघाई के फुदान विश्वविद्यालय के दक्षिण एशिया विशेषज्ञ और नई दिल्ली में चीनी दूतावास के पूर्व राजनयिक लिन मिनवांग ने कहा कि चीन निश्चित रूप से भारत के साथ रिश्ते बेहतर करना चाहता है.

लेकिन अभी यह देखना बाकी है कि भारत इसके लिए कितना तैयार है.

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच किसी बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम है. कहां फंस सकती है बात?

नई दिल्ली स्थित ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष हर्ष पंत ने कहा कि भारत और चीन के बीच अभी भी "विश्वास की कमी" काफी ज्यादा है.

उनके मुताबिक, चीन के पास बड़ी आर्थिक ताकत है और वह इसका इस्तेमाल करके खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के तौर पर पेश कर सकता है. खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश अमेरिका की व्यापार नीतियों से प्रभावित हैं.

मार्च में भारत ने 2020 के सीमा विवाद के बाद चीन से निवेश पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी.

इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, पूंजीगत सामान और सौर सेल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई.

भारत कुछ क्षेत्रों में भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों को जल्द मंजूरी देने पर भी विचार कर रहा है.

हालांकि, इसके बावजूद चीन की बड़ी कंपनियों के लिए भारत में कारोबार करना आसान नहीं हुआ है.

एक भारतीय सरकारी सूत्र के मुताबिक, भारत में कड़ी जांच का सामना करने के बाद एक कंपनी ने अपना प्रस्तावित निवेश टाल दिया. ग्रेट वॉल मोटर और बीवाईडी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया.

चीनी कंपनियों के प्रस्ताव की हो रही जांच रॉयटर्स की रिपोर्ट में सामने आया कि नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र से पता चला कि भारत में चीनी कंपनियों के प्रस्तावित निवेशों की चीन में भी कड़ी जांच हो रही है.

खास तौर पर उन क्षेत्रों में जांच ज्यादा है, जहां आधुनिक तकनीक और बड़े स्तर का विनिर्माण शामिल है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स से कहा कि शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि दोनों देश "साझेदार हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं". दोनों देश एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं.

भारत के व्यापार और विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया.

मोबाइल कंपनी शाओमी के खिलाफ जांच रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार चीन की मोबाइल कंपनी शाओमी के खिलाफ जांच की सिफारिश पर भी विचार कर रही है.

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने कंपनी पर भारत में कारोबार से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और विदेशी निवेश कानूनों के उल्लंघन को लेकर जांच की सिफारिश की है.

हालांकि, शाओमी का कहना है कि वह भारत के सभी कानूनों का पालन करती है और उसे एसएफआईओ की ओर से अभी कोई सूचना नहीं मिली है. पिछले साल भारत और चीन ने दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू की थीं.

भारत ने चीनी कारोबारियों के लिए वीजा प्रक्रिया में भी कुछ राहत दी थी.

हालांकि, उद्योग जगत के एक अधिकारी के मुताबिक, चीन में कारोबार करने की इच्छा रखने वाले कुछ भारतीय व्यापारियों को हाल में वीजा मिलने में परेशानी हुई है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अपने कानून और नियमों के तहत चीन जाने की वास्तविक जरूरत वाले भारतीय नागरिकों को वीजा जारी करता है. यह भी पढ़ें: Explainer: भारत में फूड सेफ्टी पर क्यों बढ़ी सख्ती?

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📡 स्रोत: NewsData.io

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