Explainer: कैसे पाक की नाक में दम कर रहा भारत, कौन से हथियार पाकिस्तान की उड़ा रहे नींद

Explainer: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का एक बड़ा केंद्र अब केवल सीमा या आतंकवाद नहीं, बल्कि पानी भी बन गया है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया, जिसके बाद पाकिस्तान की चिंता खुलकर सामने आने लगी.
इस फैसले को लेकर इस्लामाबाद लगातार बयान दे रहा है और भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगा रहा है. हालांकि, भारत का रुख स्पष्ट रहा है कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में पुराने तौर-तरीकों से रिश्ते नहीं चल सकते.
ऐसे में सिंधु नदी तंत्र और उस पर भारत की परियोजनाएं पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन गई हैं. पानी को लेकर क्यों परेशान है पाकिस्तान? सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया था.
इस व्यवस्था में पश्चिमी नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया, जबकि पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर भारत को अधिक अधिकार मिले. पाकिस्तान की कृषि और बिजली व्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर काफी निर्भर है.
इसलिए इस व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की आशंका भी वहां राजनीतिक और आर्थिक चिंता पैदा करती है. यही वजह है कि पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने हाल में भारत पर पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
उनका दावा है कि भारत पानी रोककर या अचानक छोड़कर पाकिस्तान के लिए संकट पैदा कर सकता है. भारत के पास वास्तव में कौन से विकल्प हैं? यह समझना जरूरी है कि भारत के पास ऐसा कोई बटन नहीं है जिसे दबाते ही पाकिस्तान जाने वाला पूरा पानी बंद हो जाए.
नदियों का प्रवाह प्राकृतिक है और बड़े जलाशयों तथा परियोजनाओं की अपनी भौतिक सीमाएं हैं. लेकिन भारत के पास जल प्रबंधन, भंडारण और नदी परियोजनाओं को तेज करने की क्षमता जरूर है. यही पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता है. भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत परियोजनाओं पर काम कर रहा है.
इन परियोजनाओं का उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ नदी के पानी का बेहतर उपयोग करना है. हथियार नंबर-1: जलविद्युत परियोजनाएं भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत उसकी नदी परियोजनाएं हैं. जम्मू-कश्मीर में चिनाब और उसकी सहायक नदियों पर कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट विकसित किए गए हैं.
इन परियोजनाओं के जरिए भारत पानी के बहाव को पूरी तरह रोकने के बजाय नदी के पानी का नियंत्रित और उपयोगी इस्तेमाल कर सकता है. पाकिस्तान के लिए चिंता इसलिए बढ़ती है क्योंकि भारत यदि अपनी उपलब्ध जल परियोजनाओं की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करता है तो पाकिस्तान को मिलने वाले पानी के समय और प्रवाह में बदलाव महसूस हो सकता है.
हथियार नंबर-2: बगलिहार और किशनगंगा भारत की जल रणनीति में बगलिहार और किशनगंगा जैसी परियोजनाएं पहले से चर्चा में रही हैं. किशनगंगा परियोजना झेलम नदी प्रणाली से जुड़ी है, जबकि बगलिहार चिनाब नदी पर स्थित है. इन परियोजनाओं को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी विवाद अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच चुका है.
भारत का तर्क रहा है कि वह संधि के तहत अनुमत प्रावधानों के अनुसार नदी जल का उपयोग कर रहा है. पाकिस्तान को आशंका है कि भविष्य में ऐसी परियोजनाओं की संख्या और क्षमता बढ़ने से उसके जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है.
हथियार नंबर-3: चिनाब पर बढ़ती क्षमता चिनाब पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण नदी है. इसलिए इस नदी पर भारत की परियोजनाओं को लेकर इस्लामाबाद की नजर हमेशा बनी रहती है. भारत ने चिनाब बेसिन में कई परियोजनाओं पर काम किया है.
सलाल, दुलहस्ती और रतले जैसी परियोजनाएं इसी रणनीतिक महत्व को दिखाती हैं. भारत के लिए ये परियोजनाएं केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं हैं. इनके जरिए पहाड़ी क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
हथियार नंबर-4: पानी का बेहतर भंडारण पाकिस्तान की चिंता का एक बड़ा कारण यह है कि यदि भारत भविष्य में बड़े स्तर पर जल भंडारण क्षमता विकसित करता है तो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है. हालांकि, यहां भी वास्तविकता को समझना जरूरी है.
भारत के पास फिलहाल इतना विशाल भंडारण ढांचा नहीं है कि वह सिंधु प्रणाली का पूरा पानी अपनी इच्छा से रोक सके. लेकिन भंडारण क्षमता में वृद्धि और जल परियोजनाओं का विस्तार पाकिस्तान के लिए दीर्घकालीन रणनीतिक चुनौती जरूर बन सकता है.
हथियार नंबर-5: जलविद्युत और रणनीतिक दबाव जल परियोजनाओं का एक दूसरा फायदा बिजली उत्पादन है. जम्मू-कश्मीर में बड़ी जलविद्युत क्षमता मौजूद है. यदि इसका अधिक इस्तेमाल होता है तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा में फायदा मिलेगा. यानी एक ही नदी संसाधन से भारत को बिजली, सिंचाई और रणनीतिक जल प्रबंधन—तीनों क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है.
इसी कारण पाकिस्तान केवल पानी के प्रवाह को लेकर ही चिंतित नहीं है, बल्कि भारत के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर को भी रणनीतिक नजर से देख रहा है. क्या भारत पाकिस्तान का पानी पूरी तरह रोक सकता है? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है. इसका सीधा जवाब है...तुरंत और पूरी तरह नहीं.
भारत की भौगोलिक स्थिति, नदी का प्राकृतिक प्रवाह और मौजूदा जल संरचना ऐसी नहीं है कि पाकिस्तान जाने वाले पूरे पश्चिमी नदी जल को अचानक बंद कर दिया जाए. लेकिन भारत के पास अपनी हिस्सेदारी और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की गुंजाइश है. भविष्य में नई परियोजनाएं और बेहतर जल प्रबंधन इस क्षमता को बढ़ा सकते हैं.
इसलिए पाकिस्तान की चिंता तत्काल पानी बंद होने से ज्यादा भविष्य में भारत की बढ़ती जल प्रबंधन क्षमता को लेकर है. पाकिस्तान की 'रेड लाइन' क्यों?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही कह चुके हैं कि पानी की एक-एक बूंद उसके लिए रेड लाइन है. इसकी वजह साफ है. पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. पानी के प्रवाह में बड़े बदलाव का असर खेती, खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
यही कारण है कि सिंधु जल संधि का मुद्दा पाकिस्तान के लिए केवल विदेश नीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा मामला है. भारत के लिए भी चुनौती कम नहीं हालांकि, इस पूरे मामले में भारत के सामने भी चुनौतियां हैं.
नई परियोजनाएं बनाना, जमीन और पर्यावरण संबंधी मंजूरियां हासिल करना तथा बड़े बांधों और बिजली परियोजनाओं को पूरा करना समय लेने वाली प्रक्रिया है. इसके अलावा भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कदमों की कानूनी और कूटनीतिक व्याख्या भी करनी होगी.
इसलिए जल संसाधन को रणनीतिक ताकत में बदलने के लिए केवल घोषणा नहीं, बल्कि लंबे समय की योजना और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत होगी.
आतंकवाद के खिलाफ पानी बना रणनीतिक संदेश पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का भारत का फैसला पाकिस्तान के लिए इसलिए बड़ा संदेश है क्योंकि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच पानी का मुद्दा आतंकवाद से अलग रखा गया था. अब भारत ने संकेत दिया है कि आतंकवाद और सामान्य रिश्ते साथ-साथ नहीं चल सकते.
पाकिस्तान की ओर से लगातार आ रहे बयान बताते हैं कि इस फैसले का दबाव वहां महसूस किया जा रहा है. असली चिंता आज से ज्यादा कल की है भारत के पास फिलहाल पाकिस्तान का पानी पूरी तरह रोकने की क्षमता नहीं है, लेकिन उसके पास अपनी जल क्षमता को बढ़ाने के कई रास्ते हैं.
बगलिहार, किशनगंगा, रतले और चिनाब बेसिन की अन्य परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं. इनके साथ नई जलविद्युत और भंडारण परियोजनाएं भारत की स्थिति को और मजबूत कर सकती हैं.
यही पाकिस्तान की असली चिंता है आज पानी कितना बदला है, इससे ज्यादा चिंता इस बात की है कि आने वाले वर्षों में भारत अपने नदी जल का कितना बेहतर इस्तेमाल कर पाएगा. इसलिए सिंधु जल विवाद अब सिर्फ पानी का विवाद नहीं रह गया है.
यह भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद, कूटनीति, सुरक्षा और रणनीतिक दबाव की बड़ी तस्वीर का हिस्सा बन चुका है. यह भी पढ़ें - भारत का पाकिस्तान पर बड़ा एक्शन, नई दिल्ली में हाई कमीशन के बाहर चलाया बुलडोजर, जानें क्यों की कार्रवाई
📡 स्रोत: NewsData.io