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Explainer: अब कंगाल हो जाएगा ईरान? खार्ग द्वीप के तबाह होने से तेल निर्यात पर लगेगा ब्रेक, अब क्या बचे विकल्प

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explainer: अब कंगाल हो जाएगा ईरान? खार्ग द्वीप के तबाह होने से तेल निर्यात पर लगेगा ब्रेक, अब क्या बचे विकल्प

Kharg Island: कई दिनों के जुबानी जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू हो चुकी है. वैसे तो ट्रंप ईरान को कई बार बर्बाद करने का दावा कर चुके हैं. बावजूद इसके ईरान लगातार अमेरिकी हमलों का जवाब दे रहा है.

अब ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप को तबाह करने का दावा किया है. हालांकि सबूत के तौर पर ट्रंप ने केवल इसका एआई वीडियो जारी किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले कई बार दावा कर चुके हैं कि युद्ध में ईरानी सेना खत्म हो चुकी है. ईरान के पास लड़ने की ताकत नहीं बची है. साथ ही कह चुके हैं कि ईरान अब सरेंडर करना चाहता है.

लेकिन ईरान हमेशा से इस अमेरिकी दावे का विरोध करता रहा. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को आर्थिक रूप से बर्बाद करने की कसम खाई. इसके लिए कई तरह के प्रतिबंध की तैयारी की और कई प्रतिबंध लगाए भी. इन सबसे बढ़कर ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया.

ट्रंप ने एआई वीडियो जारी करके दावा किया कि ईरान के खार्ग द्वीप के परखच्चे उड़ा दिए गए हैं. U.S. President Donald Trump posted an AI generated video of Kharg Island being blown up.

pic.twitter.com/N3SsWTYswl — Open Source Intel (@Osint613) August 31, 2026 ...तो कंगाल हो जाएगा ईरान अगर राष्ट्रपति ट्रंप का यह दावा सच है तो यह ईरान के लिए सबसे बड़ा नुकसान है.

ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा इसी द्वीप पर बने टर्मिनल से होकर गुजरता है. अगर यह पूरी तरह तबाह हो गया तो ईरान का निर्यात लगभग बंद हो जाएगा. ईरान में पहले से रही महंगाई आसमान छू रही है. ऐसे में अगर ईरान का निर्यात बंद हो जाएगा तो कंगाल होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.

यह भी पढ़ें: 'खार्ग द्वीप के परखच्चे उड़ा दिए...', राष्ट्रपति ट्रंप का अब तक का सबसे बड़ा दावा, जारी किया तबाही का AI वीडियो ईरान की आर्थिक जीवन रेखा है खार्ग द्वीप खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 28 किलोमीटर दूर स्थित है. यह बुशहर बंदरगाह के उत्तर-पश्चिम में है और आकार में करीब 8 वर्ग मील का है.

ईरान के लिए यह द्वीप बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं बने टर्मिनल से होता है. यहां समुद्र काफी गहरा है, इसलिए बड़े तेल टैंकर आसानी से पहुंचकर तेल लोड कर सकते हैं. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खार्ग द्वीप भी चर्चा में है और इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है.

हर हफ्ते नई कार्रवाई का संकेत अमेरिका अब ईरान पर सैन्य दबाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ाने की तैयारी में है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि ईरान से जुड़े बैंकों और संस्थानों के खिलाफ हर हफ्ते नई कार्रवाई की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका की पहली नजर बैंकों पर है, ताकि ईरान के पैसे और उसकी सरकार को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाई जा सके. बेसेंट के मुताबिक, कुछ बैंकों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर किसी संस्था को अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह बाहर किया जा सकता है. यानी आने वाले समय में ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक शिकंजा और कड़ा हो सकता है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने लारक द्वीप पर दो ईरानी लॉन्चरों को बनाया निशाना, बदले में ईरान ने जॉर्डन US कैंप पर दागीं मिसाइलें अगर खार्ग बंद हुआ तो... बचेंगे ये विकल्प अगर खार्ग द्वीप का तेल टर्मिनल लंबे समय तक बंद या निष्क्रिय रहता है, तो ईरान के लिए कच्चे तेल का निर्यात जारी रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।

ऐसी स्थिति में उसके सामने मुख्य रूप से 3 रास्ते हो सकते हैं: 1. दूसरे बंदरगाहों का सहारा ईरान खार्ग के बजाय जैस्क जैसे दूसरे तेल टर्मिनलों से निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर सकता है. जैस्क होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर है, इसलिए इसका इस्तेमाल रणनीतिक रूप से अहम हो सकता है. हालांकि, इसकी क्षमता खार्ग के मुकाबले कम है.

इसके अलावा ईरान पड़ोसी देशों के रास्ते सड़क या रेल के जरिए सीमित मात्रा में तेल बाहर भेजने की कोशिश कर सकता है, लेकिन इससे खार्ग की भरपाई करना मुश्किल होगा. 2. होर्मुज जलडमरूमध्य को दबाव के तौर पर इस्तेमाल करना ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी स्थिति का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए कर सकता है.

यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की धमकी देकर वह तेल बाजार और दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है. हालांकि, ऐसा कदम क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट को और बढ़ा सकता है. 3.

तेल का उत्पादन और घरेलू इस्तेमाल बढ़ाना अगर तेल बाहर भेजने की क्षमता कम हो जाती है तो ईरान कुछ तेल को घरेलू रिफाइनरियों में इस्तेमाल करने या उपलब्ध भंडारण सुविधाओं में रखने की कोशिश कर सकता है. लेकिन लंबे समय तक निर्यात बाधित रहने पर भंडारण की जगह कम पड़ सकती है.

ऐसी स्थिति में तेल उत्पादन भी घटाना पड़ सकता है, जिससे ईरान की तेल आय पर और दबाव बढ़ेगा. मार्च में भी अमेरिका ने बनाया था निशाना गत 13 मार्च को अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर पहली बार सीधे हवाई हमला किया था. यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई थी.

अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स समुद्री माइंस बिछाने और जलडमरूमध्य की आवाजाही को प्रभावित करने की तैयारी कर रहे थे. हमले में खार्ग द्वीप पर मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों, मिसाइल बंकरों और माइंस के भंडारण वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया.

हालांकि, अमेरिका ने उस समय खार्ग के महत्वपूर्ण तेल और गैस ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया था. यह खास तौर पर अहम था क्योंकि खार्ग ईरान का सबसे बड़ा कच्चे तेल का निर्यात टर्मिनल है.

इससे पहले 1980 के दशक में हुए ईरान-इराक युद्ध के दौरान इस द्वीप पर भारी बमबारी हुई थी, लेकिन वह हमले इराक की वायुसेना द्वारा किए गए थे, अमेरिका द्वारा नहीं। यह भी पढ़ें: भारत-उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौते, 5 बड़ी योजनाओं का ऐलान, व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदले संबंध

📡 स्रोत: NewsData.io

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