विदेश

Explainer: खाने की कमी, क्रू में मानसिक तनाव... आखिर मीडिल ईस्ट से 9 महीने बाद क्यों लौट रहा US का युद्धपोत अब्राहम लिंकन?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Explainer: खाने की कमी, क्रू में मानसिक तनाव... आखिर मीडिल ईस्ट से 9 महीने बाद क्यों लौट रहा US का युद्धपोत अब्राहम लिंकन?

USS Abraham Lincoln: अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से दोनों देश एक दूसरे पर पूरी क्षमता से हमला कर रहे हैं. कई बार दोनों के थमने के बाद कुछ दिनों की शांति भी हुई लेकिन दोनों देश अपने बेहतर हथियार इस्तेमाल करते रहे. इसी बीच अमेरिका ने एकअहम फैसला लिया है.

ईरान संघर्ष के दौरान मीडिल ईस्ट में 9 महीने से ज्यादा समय तक तैनात रहने के बाद अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन अब वापस लौट रहा है. अमेरिका का यह फैसला चर्चा का विषय बन गया है. इसके पीछे क्या कारण हैं. आइए विस्तार से जानते हैं.

सैन डिएगो स्थित इस युद्धपोत की जगह जापान में तैनात यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन ने ले ली है. इसके साथ ही करीब 5,000 सदस्यों वाले चालक दल की लंबे समय से चल रही तैनाती खत्म हो गई है. यूएसएस अब्राहम लिंकन 21 नवंबर 2025 को सैन डिएगो से रवाना हुआ था. फरवरी में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद इसे मध्य पूर्व की ओर भेज दिया गया.

इस दौरान युद्धपोत ने अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए हजारों हवाई उड़ानों में मदद की, जिससे चालक दल पर काम का दबाव काफी बढ़ गया. यह भी पढ़ें: तानाशाह किम जोंग से मुलाकात की चाहत पर ट्रंप को झटका, उत्तर कोरिया ने बैठक के लिए रखीं सख्त शर्तें क्यों हो रही वापसी?

सीबीएस न्यूज के मुताबिक, लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण जहाज के चालक दल में थकान और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी. खाने की कमी की शिकायतें भी सामने आई थीं. जहाज की वापसी ऐसे समय हुई है, जब सैनिकों के परिवारों ने लंबे समय तक समुद्र में रहने और जहाज पर सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है.

परिवारों का कहना है कि लगातार लंबी तैनाती से सैनिकों में थकान और मानसिक तनाव बढ़ा है. उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने और खाने की कमी की शिकायतों का भी जिक्र किया.

डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी उठाए थे सवाल परिवारों की शिकायतों के बाद वाशिंगटन में डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी सैनिकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए और सरकार से जवाब मांगा.

रिपोर्टों के मुताबिक, यूएसएस अब्राहम लिंकन बिना किसी बंदरगाह पर रुके 200 से ज्यादा दिनों तक समुद्र में रहा. सांसदों ने इसे आधुनिक दौर में एक रिकॉर्ड बताया है. हालांकि, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने जहाज की स्थिति खराब होने की खबरों को खारिज किया है. अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ऐसी रिपोर्टों को "पूरी तरह गलत" बताया.

वहीं, कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने मीडिया की रिपोर्टिंग को "बेईमान" करार दिया.

ट्रंप ने सवालों को किया था खारिज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जहाज की लंबी तैनाती को लेकर उठाए गए सवालों को खारिज किया. 14 अगस्त को जब उनसे पूछा गया कि क्या 260 से ज्यादा दिन समुद्र में रहना बहुत लंबा समय है, तो उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं था.

उन्होंने बताया कि लिंकन की जगह अब एक दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात किया जा रहा है.

चालक दल की सेहत पर नजर अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रेड कूपर ने चालक दल की सेहत और कल्याण का जायजा लेने के लिए सप्ताहांत में यूएसएस अब्राहम लिंकन का दौरा किया. 16 अगस्त को जारी बयान में उन्होंने इस दौरे को "बेहद प्रेरणादायक" बताया और लंबे समय तक तैनाती के बावजूद चालक दल के हौसले की तारीफ की.

कूपर ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के 11 सक्रिय विमानवाहक पोतों में यूएसएस लिंकन पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामले सबसे कम हैं. उन्होंने इसका श्रेय जहाज के नेतृत्व को दिया, जिसने सैनिकों के स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती को प्राथमिकता दी.

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि लंबे समय तक समुद्र में रहना काफी तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होता है. कूपर ने कहा कि समुद्र में लंबे समय तक तैनाती अपने आप में एक बड़ी चुनौती है और हर व्यक्ति तनाव से अलग-अलग तरीके से निपटता है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका का हिज्बुल्लाह पर बड़ा एक्शन, घोषित किया प्रॉक्सी संगठन, 10 लोगों पर लगाया बैन आत्महत्या के प्रयास के हुई चर्चा नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक, जहाज पर आत्महत्या के प्रयास या आत्महत्या के विचारों के मामलों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है.

हालांकि, 3 अगस्त को एक नाविक के जहाज से गिरने की घटना की जांच जारी है. बाद में उस नाविक को सुरक्षित बचा लिया गया था. वहीं, विमानवाहक पोत की वापसी से सैनिकों के परिवारों ने राहत की सांस ली है. कई परिवार महीनों से अपने परिजनों के घर लौटने का इंतजार कर रहे थे.

जैक्सन केली के पिता जेफरसन केली ने सीबीएस न्यूज से कहा कि वह अपने बेटे को घर लौटते देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. विमानवाहक पोत को सैन डिएगो स्थित अपने गृह बंदरगाह तक वापस पहुंचने में लगभग तीन सप्ताह का समय लगने की उम्मीद है।

लाल सागर और खाड़ी में भूमिका निभाई ईरान के साथ जारी तनाव के दौरान यूएसएस अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना के प्रमुख विमानवाहक पोतों में शामिल रहा. जनवरी 2026 से यह ईरान के आसपास के क्षेत्र में तैनात था और अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए एक अहम एयरबेस की तरह काम करता रहा.

इस दौरान जहाज ने लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा में भी भूमिका निभाई. करीब 9 महीने तक समुद्र में रहने के दौरान लगभग 5,000 सैनिकों के चालक दल पर लंबे समय तक तैनाती का शारीरिक और मानसिक दबाव भी पड़ा.

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश के नए राष्ट्रप​ति बने फखरुल इस्लाम आलमगीर, जानें भारत के कितने करीब अब तक अमेरिका के 37.5 अरब डॉलर खर्च मध्य पूर्व में ईरान और उससे जुड़े सैन्य अभियानों पर अमेरिका का खर्च लगातार बढ़ रहा है. पेंटागन के अनुसार, अब तक करीब 37.5 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं.

वहीं, कुछ स्वतंत्र अनुमानों में शुरुआती सैन्य अभियान और हथियारों की दोबारा भरपाई समेत कुल खर्च 113 अरब डॉलर तक पहुंचने की बात कही गई है. इस खर्च में बड़ा हिस्सा मिसाइलों, बमों और अन्य सैन्य उपकरणों पर हुआ है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, अभियान के सबसे सक्रिय दौर में अमेरिका का रोजाना खर्च करीब 38.5 करोड़ से 89.1 करोड़ डॉलर तक रहा. बढ़ते खर्च को देखते हुए पेंटागन ने कांग्रेस से अतिरिक्त बजट की मांग भी की है.

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।