FAIMA और NMC चेयरमैन की बैठक, डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी समेत इन मुद्दों पर हुई चर्चा
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फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार (2 सितंबर 2026) को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के चेयरमैन से मुलाकात कर रेजिडेंट डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और मेडिकल शिक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. यह बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली. बैठक में FAIMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.
श्रीनाथ दुब्याला के समेत प्रातिनिधिमंडल ने NMC चेयरमैन के सामने देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की समस्याएं रखीं. बैठक में रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी, काम करने की परिस्थितियां और ड्यूटी के बाद अनिवार्य आराम जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया.
एसोसिएशन ने रेजिडेंट डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके बेहतर संस्थागत समर्थन की जरूरत पर भी जोर दिया. इसके अलावा अलग-अलग संस्थानों में स्टाइपेंड में अंतर और स्टाइपेंड का समय पर भुगतान करने का मुद्दा भी NMC के सामने रखा गया.
FAIMA ने इंटर्नशिप कर रहे विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMGs) के लिए समान स्टाइपेंड की मांग भी उठाई. बैठक में मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी और बुनियादी ढांचे की समस्याओं पर भी चर्चा हुई. FAIMA ने NMC के नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की.
NEET-PG और NEET-SS परीक्षा और काउंसलिंग के लिए समय पर और तय अकादमिक कैलेंडर की जरूरत भी बताई गई. FAIMA ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों की ट्रेनिंग, क्लिनिकल एक्सपोजर, शिक्षकों की उपलब्धता और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे भी उठाए. संगठन ने मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल प्रैक्टिस के उचित नियमन पर भी जोर दिया.
बैठक का एक प्रमुख मुद्दा प्रस्तावित NEXT परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस रहा. FAIMA ने कहा कि ENT और Ophthalmology विषय, जो पहले Part-1 में शामिल थे, अब Part-2 यूनिवर्सिटी परीक्षा में रखे गए हैं. इससे छात्रों का पहले से बड़ा सिलेबस और बढ़ गया है.
FAIMA ने NMC से मांग की कि छात्रों पर बढ़ते अकादमिक बोझ को देखते हुए ENT और Ophthalmology को फिर से Part-1 में शामिल किया जाए. एसोसिएशन के अनुसार, NMC चेयरमैन ने इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और मामले पर विचार करने का आश्वासन भी दि
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
FAIMA और NMC चेयरमैन के बीच हुई बैठक का मुख्य विषय था रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी, मेडिकल छात्रों की शैक्षणिक चुनौतियाँ और चिकित्सा शिक्षा के सुधार। यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन मुद्दों पर समाधान न मिलने से डॉक्टरों का मनोबल घट सकता है, जिससे रोगी देखभाल पर असर पड़ेगा। यदि ड्यूटी कम की जाए और शिक्षा प्रणाली सुधारी जाए तो डॉक्टरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, रोगियों को बेहतर इलाज मिलेगा, और स्वास्थ्य क्षेत्र की समग्र गुणवत्ता में सुधार होगा।