फांसी की सजा के बाद बदल जाएगी मुस्कान-साहिल की जेल में जिंदगी, अब अलग-अलग जेलों में भेजने की तैयारी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
फांसी की सजा के बाद बदल जाएगी मुस्कान-साहिल की जेल में जिंदगी, अब अलग-अलग जेलों में भेजने की तैयारी सफेद या क्रीम रंग की वर्दी पहनेगी मुस्कान, साहिल को करना पड़ सकता है मेहनत वाला काम; कैदी नंबर से होगी पहचान, एक-दूसरे से मिलने पर भी पाबंदी मेरठ। चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के दोषी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब जेल में उनकी जिंदगी के तौर-तरीके बदल जाएंगे।
दोनों 19 मार्च 2025 से मेरठ जिला जेल में बंद हैं। सजा सुनाए जाने के बाद उन पर सजायाफ्ता कैदियों से जुड़े जेल नियम लागू होंगे। जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों को भविष्य में दूसरी जेलों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। सफेद वर्दी में नजर आएंगे मुस्कान और साहिल मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ.
वीरेश राज शर्मा के अनुसार, विचाराधीन बंदियों को अपने कपड़े पहनने की छूट होती है, लेकिन दोषी करार दिए जाने और सजा होने के बाद जेल के निर्धारित नियम लागू होते हैं। इसके तहत मुस्कान को सफेद या हल्के क्रीम रंग की साड़ी अथवा सलवार-सूट और साहिल को पुरुष कैदियों की निर्धारित वर्दी पहननी होगी।
साहिल को सौंपा जा सकता है काम सजा के बाद जेल में कैदियों को नियमानुसार काम सौंपा जाता है। साहिल को भी जेल प्रशासन की ओर से निर्धारित काम करना पड़ सकता है। उसकी जिम्मेदारी और काम का स्वरूप जेल के नियमों तथा प्रशासनिक निर्णय के अनुसार तय होगा। मुस्कान के साथ उसकी एक साल से कम उम्र की बेटी रह रही है।
बच्ची की देखभाल को ध्यान में रखते हुए मुस्कान से काम लेने के संबंध में जेल प्रशासन नियमों के अनुसार निर्णय करेगा। डाइट और निगरानी में भी हो सकता है बदलाव सजायाफ्ता कैदियों के लिए भोजन और काम से संबंधित व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। काम की प्रकृति और जरूरत के आधार पर आहार में बदलाव किया जा सकता है।
मुस्कान और साहिल की निगरानी भी जेल प्रशासन के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जारी रहेगी। सजा के बाद दोनों को कैदी नंबर आवंटित किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जेल में कैदियों की गिनती और रिकॉर्ड रखने के लिए यह नंबर महत्वपूर्ण होता है। मुस्कान फिलहाल महिला बंदियों की बैरक में है, जबकि साहिल पुरुष बंदियों की बैरक में बंद है।
आगे उनकी बैरक में बदलाव जेल प्रशासन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। दूसरी जेल में भेजने की तैयारी सजायाफ्ता कैदियों को उनकी श्रेणी और जेल प्रशासन की व्यवस्था के अनुसार दूसरी जेलों में स्थानांतरित किया जा सकता है। मुस्कान और साहिल को भी भविष्य में अलग-अलग जेलों में भेजने की संभावना है।
हालांकि, यह प्रक्रिया संबंधित जेलों में उपलब्ध क्षमता, प्राथमिकता और प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगी। स्थानांतरण होने तक दोनों मेरठ जिला जेल में रहेंगे। मुस्कान की बेटी की उम्र अभी एक साल से कम है। जेल नियमों के तहत निर्धारित आयु तक बच्चा अपनी मां के साथ जेल में रह सकता है। इसलिए मुस्कान के स्थानांतरण की स्थिति में बच्ची के रहने की व्यवस्था भी नियमानुसार की जाएगी।
अब एक-दूसरे से मिलना नहीं होगा आसान मुस्कान और साहिल के बीच वैवाहिक या रक्त संबंध नहीं है। सजा के बाद दोनों महिला और पुरुष बंदियों के लिए निर्धारित अलग-अलग व्यवस्थाओं में रहेंगे। ऐसे में जेल के भीतर उनकी मुलाकात सामान्य रूप से संभव नहीं होगी। हालांकि, किसी मुलाकात या संपर्क पर अंतिम निर्णय लागू जेल नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार ही होगा।
नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद अब दोनों की आगे की जेल व्यवस्था, संभावित स्थानांतरण और अपील की प्रक्रिया नियमों के अनुसार तय होगी। दोषियों को कानून के तहत उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार भी है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने के लिए हमें हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए। विवादों का समाधान संवाद, कानूनी प्रक्रियाओं और सहानुभूति से किया जा सकता है। जब कोई व्यक्ति अपराध के जाल में फँसता है, तो उसे समाज में पुनः समावेशित करने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और मानसिक समर्थन आवश्यक है। पीड़ितों के प्रति संवेदना दिखाते हुए, हमें एक ऐसी संस्कृति बनानी चाहिए जहाँ शांति और सहिष्णुता का स्थान हो।