फरवरी से जनगणना:इंदौर की आबादी 44 लाख होने के संकेत, 65% आबादी शहर में
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →मकान सूचीकरण के दौरान सामने आए आंकड़ों में इंदौर जिले की आबादी 2011 के 32.77 लाख से बढ़कर 44.40 लाख तक पहुंचने का संकेत मिला है। यानी 15 साल में आबादी 11.64 लाख बढ़ने का संकेत है। इन आंकड़ों के मुताबिक, शहर में सबसे ज्यादा आबादी पुराने शहर के बजाय नए विकसित और विस्तार वाले इलाकों में दर्ज हुई है।
नगर निगम के 22 जोनों में जोन-19 में सबसे ज्यादा 2.47 लाख आबादी बताई गई है। अब जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। दूसरे चरण की तैयारी के लिए सोमवार से इंदौर में जनगणना कर्मियों का प्रशिक्षण शुरू हो गया। मंगलवार को जिला मुख्यालय, ग्रामीण और छावनी बोर्ड क्षेत्र के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नगर निगम के कर्मचारियों की ट्रेनिंग 14 और 15 अक्टूबर को होगी। फरवरी 2027 में जनगणना का फील्ड कार्य होना है। दूसरे चरण में क्या होगा?
पहले चरण में मकानों, आवासीय सुविधाओं, परिवारों की परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। इसी प्रक्रिया से आबादी के प्रारंभिक आंकड़े भी सामने आए हैं। हालांकि, इन्हें अंतिम जनसंख्या नहीं माना जा सकता। दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी।
इसमें शिक्षा, प्रवास और अन्य निर्धारित विवरणों के साथ जाति संबंधी जानकारी भी शामिल होगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जिले की करीब 65% आबादी नगर निगम सीमा में दर्ज हुई है। शेष आबादी महू, देपालपुर, सांवेर, राऊ सहित अन्य तहसीलों, नगर परिषदों और छावनी क्षेत्र में है। इससे साफ है कि इंदौर का विस्तार निगम सीमा से बाहर आसपास के क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है।
महू, देपालपुर, सांवेर और राऊ में दर्ज आबादी भविष्य की आवासीय जरूरतों, परिवहन और नागरिक सुविधाओं की योजना के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
📡 स्रोत: NewsData.io