फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाली पूर्व आंगनबाड़ी-कार्यकत्री पर FIR:हरदोई में डीएम के आदेश पर हुई कार्रवाई, CDPO ने दर्ज कराई रिपोर्ट
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →हरदोई जनपद की शाहाबाद कोतवाली में फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाली पूर्व आंगनवाड़ी कार्यकत्री के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। बाल विकास परियोजना शाहाबाद के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केंद्र घियरई पर तैनात रहीं पूर्व आंगनवाड़ी कार्यकत्री सुनीता देवी (पत्नी अरुण कुमार सिंह, निवासी ग्राम रामपुर हमजा) के विरुद्ध धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा करने के गंभीर आरोपों में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली गई है।
यह रिपोर्ट CDPO निशा सिंह ने शनिवार की देर रात 11:04 पर दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, सुनीता देवी द्वारा संविदा के आधार पर आंगनवाड़ी कार्यकत्री के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने हेतु कूटरचित एवं फर्जी अभिलेख प्रस्तुत किए गए थे। विभागीय जांच के दौरान जब उनके ये अभिलेख फर्जी और कूटरचित पाए गए, तब उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की गई।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लंबे समय तक सेवा में बने रहने के कारण डीएम, हरदोई ने कड़ा रुख अपनाया। डीएम द्वारा दिनांक 07 अगस्त 2026 को सुनीता देवी की मानदेय सेवाएं समाप्त करने तथा उनके विरुद्ध प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने का स्पष्ट अनुमोदन प्रदान किया गया था। डीएम के इसी अनुमोदन के अनुक्रम में, कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरदोई द्वारा संबंधित की संविदा सेवाएं पहले ही 10 अगस्त को समाप्त की जा चुकी हैं।
इसके उपरांत, कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से FIR दर्ज कराने के निर्देश CDPO को दिए गए। इन्हीं प्रशासनिक निर्देशों और तथ्यों के आधार पर, बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) निशा सिंह ने इस मामले में लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पूर्व आंगनवाड़ी कार्यकत्री सुनीता देवी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं—धारा 338, 336(3), 318(4) और 340(2)—के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
पुलिस अब इस पूरे मामले में आगे की विधिक जांच और कार्रवाई कर रही है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
सत्य और पारदर्शिता समाज की नींव है। जब कोई झूठे दस्तावेज़ से पद प्राप्त करता है, तो वह न केवल अपने आप को बल्कि समाज के भरोसे को भी धोखा देता है। ऐसे कार्यों के लिए सख्त कानूनी कदम उठाना ज़रूरी है, ताकि हर नागरिक को यह सन्देश मिले कि नियमों का पालन अनिवार्य है। इसी से हम सभी मिलकर एक ईमानदारी पर आधारित, न्यायसंगत और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।