फर्जी Form 15CB के जरिए विदेश भेजे करोड़ों रुपये, दो सीए पर मुकदमा

फर्जी Form 15CB के जरिए विदेश भेजे करोड़ों रुपये, दो सीए पर मुकदमा आगरा/गाजियाबाद। फर्जी कंपनियों और कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिए भारत से विदेश करोड़ों रुपये भेजने के मामलों में आयकर विभाग और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।
जांच में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की मदद से फर्जी Form 15CB तैयार कर सिंगापुर, हांगकांग समेत अन्य देशों में रकम भेजे जाने का आरोप सामने आया है। दोनों मामलों में संबंधित सीए समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
आयकर विभाग के अनुसार, गाजियाबाद से जुड़े मामले में सीए अमित मेहरा पर पिछले करीब तीन वर्षों में कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से लगभग 165 करोड़ रुपये विदेश भेजने का आरोप है। 18 अगस्त को आयकर विभाग की टीम ने उनके ठिकाने पर तलाशी ली थी। इस दौरान कथित फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और Form 15CB बरामद किए गए।
जांच के दौरान अमित मेहरा से पूछताछ में दिल्ली निवासी नविता कुमारी का नाम सामने आने की बात कही गई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में अमित मेहरा ने नविता कुमारी के कहने पर विदेश धन भेजने की बात स्वीकार की। मामले में आयकर विभाग के अन्वेषण विंग के उपनिदेशक डॉ.
मनोज कुमार की शिकायत पर 23 अगस्त को अमित मेहरा और नविता कुमारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आगरा में 18 फर्जी कंपनियों का मामला दूसरा मामला आगरा के ताजगंज क्षेत्र का है। यहां आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा की शिकायत पर सीए रेहान खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच में शिपिंग, टेलीकम्युनिकेशन और आईटी सेवाओं से जुड़ी 18 कथित अस्तित्वहीन कंपनियों के जरिए करीब 22.12 करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने का आरोप है।
आयकर विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों के नाम पर विदेशी भुगतान दिखाया गया और कथित तौर पर जरूरी दस्तावेजों तथा भुगतान करने वालों की पहचान का पर्याप्त सत्यापन किए बिना Form 15CB जारी किए गए। पूछताछ में रेहान खान से जुड़े मामले में सीए अभिषेक गुप्ता और निखिल हरवानी के नाम सामने आने की भी बात कही गई है।
पुलिस ने आयकर विभाग की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। देशभर में हुई थी बड़ी कार्रवाई आयकर विभाग ने 18 अगस्त को देशभर में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया था। विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई के तहत 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट और 346 कंपनियों व फर्मों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई।
करीब पांच दिनों तक चले अभियान में विदेशी मुद्रा प्रेषण से जुड़े संदिग्ध लेनदेन, फर्जी कंपनियों और दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में कथित तौर पर विदेशी भुगतान को फ्रेट चार्ज, टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर इंफॉर्मेशन सर्विस और डिजिटल मार्केटिंग जैसी सेवाओं के भुगतान के रूप में दिखाए जाने की बात सामने आई है।
विभाग ने पिछले तीन वर्षों के विदेशी मुद्रा प्रेषण से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर संदिग्ध संस्थाओं की पहचान की। Form 15CB की भूमिका Form 15CB विदेश में किए जाने वाले कुछ कर योग्य भुगतानों से संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाणपत्र होता है। इसमें भुगतान की प्रकृति, लागू कर और संबंधित कर प्रावधानों का आकलन किया जाता है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए बिना पर्याप्त सत्यापन के प्रमाणपत्र जारी किए गए और उनके आधार पर रकम विदेश भेजी गई। आयकर विभाग ने कुछ कथित फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों और फर्जी प्रविष्टियों से जुड़े मामलों की भी जांच शुरू की है।
अधिकारियों के अनुसार, तलाशी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
📡 स्रोत: NewsData.io