5 फिल्मों ने बदली एटली की पहचान, ‘राजा रानी’ से ‘जवान’ तक ऐसा रहा सफर
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साउथ के जाने-माने फिल्ममेकर एटली ने बहुत कम समय में साउथ सिनेमा से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री तक एक शानदार सफर तय किया है.
फिल्म 'राजा रानी' से उन्होंने बतौर डायरेक्टर सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की थी.
एटली ने 'थेरी', 'मर्सल' और 'बिगिल' जैसी फिल्मों के जरिए थलापति विजय के साथ लगातार काम किया और अपनी पहली हिंदी फिल्म 'जवान' में शाहरुख खान को कास्ट किया.
एटली की फिल्मों में बड़े स्टार, दमदार एक्शन और मजबूत कहानियां देखने को मिलती है.
वे मजबूत कहानी चुनते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन वो कहानी को पर्दे पर इस तरह उतारते हैं, जिससे लोग कनेक्ट कर पाते हैं.
खुद एटली कहते हैं, कमर्शियल फिल्म में सिर्फ पॉपुलर स्टार का होना काफी नहीं है, कहानी भी मजबूत होनी चाहिए.
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चलिए आज नजर डालते हैं उन पांच फिल्मों पर, जिन्होंने एटली के निर्देशन करियर को एक अलग मुकाम दिया और उनकी खास शैली को पहचान दिलाई.
राजा रानी (2013)
एटली ने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत 'राजा रानी' से की थी. फिल्म में आर्या, नयनतारा और जय लीड रोल्स में नजर आए थे. कहानी प्यार के अधूरे रह जाने के बाद जिंदगी में दोबारा आगे बढ़ने से जुडी है.
यह फिल्म बाकी फिल्मों से इसलिए अलग थी क्योंकि इसमें एटली ने बड़े एक्शन या सुपरस्टार वाली छवि के बजाय रिश्तों और भावनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया. इस फिल्म के एटली ने कोई लव स्टोरी नहीं बनाई है.
एक बार एटली ने खुद भी कहा था कि उन्हें अपने डेब्यू के बाद दोबारा लव स्टोरी न बना पाने का अफसोस है.
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📡 स्रोत: ABP Live Film
💡 पृष्ठभूमि (Background)
एटली, साउथ के प्रसिद्ध फिल्ममेकर, ने कम समय में साउथ सिनेमा से हिंदी फिल्म उद्योग तक का सफर तय किया। यह खबर उनके ‘राजा रानी’ से ‘जवान’ तक के परिवर्तन को दर्शाती है, जहाँ उन्होंने शाहरुख खान को कास्ट किया। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि क्षेत्रीय फिल्मकार भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पा सकते हैं। इस बदलाव से दर्शकों को नई कहानी कहने की शैली और विविध कलाकारों के साथ सहयोग देखने को मिलेगा। इससे भारतीय सिनेमा में सांस्कृतिक समावेश और क्षेत्रीय प्रतिभा को मान्यता मिलने की संभावना बढ़ेगी।