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फ्रांस: राष्ट्रपति ने हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की कड़ी निंदा की

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
फ्रांस: राष्ट्रपति ने हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की कड़ी निंदा की

अक्टूबर 19, नई दिल्ली: फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की कड़ी निंदा की। मैक्रों ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और दुकानों में लूटपाट करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। फ्रांस में शनिवार को महँगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, ईंधन की कीमतों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए।

कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। लिमोज शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगा दी गई, जबकि कई दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुँचा।फ्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया और लगभग एक हजार पुलिसकर्मी तथा जेंडार्मरी के जवान घायल हुए। मैक्रों ने हिंसा में शामिल अति-वामपंथी समूहों और अपराधियों की आलोचना की।

उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की जायज माँगों को भी स्वीकार किया। राष्ट्रपति ने प्रभावित कारोबारियों को सरकारी सहायता देने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूकों की समीक्षा कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर कुछ सभाओं पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देने की बात कही।

राजनीतिक दलों और श्रमिक संगठनों से शांति की अपील की। मैक्रों ने युवाओं को समाधान तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करने पर भी जोर दिया। फोटो- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (फाइल फोटो)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

फ्रांस में हाल ही में हुई हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ी निंदा की। यह विषय सार्वजनिक व्यवस्था और आर्थिक असमानता के प्रति नागरिकों की असंतुष्टि को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित नीति परिवर्तनों का संकेत देती है, जो देश की स्थिरता पर प्रभाव डाल सकती है। आम जनता पर इसका असर दोहरा है: एक तरफ कानून के प्रवर्तन से सुरक्षा बढ़ेगी, दूसरी तरफ आर्थिक सुधारों की मांगें तेज हो सकती हैं, जिससे रोज़मर्रा के जीवन में बदलाव की संभावना है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।