राजनीति

'फ्री कश्मीर, फ्री शरजील...', जामिया में आपत्तिजनक नारे-प्रदर्शन, इमरान मसूद डिटेन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'फ्री कश्मीर, फ्री शरजील...', जामिया में आपत्तिजनक नारे-प्रदर्शन, इमरान मसूद डिटेन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन के लिए पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

ये छात्र कैंपस की दीवारों पर कथित तौर पर 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारे लिखे जाने का विरोध कर रहे थे.

कांग्रेस सासंद इमरान मसूद ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और प्रदर्शन कर रहा कोई छात्र ये नहीं कह रहा है कि कश्मीर भारत का अंग नहीं है.

उन्होंने कहा, 'ये सब आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश है.

मैं अपने बच्चों के लिए अपनी जान भी दे सकता हूं, ये मेरे बच्चे हैं.' वहीं कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि जो लड़के जेल में हैं उनके निश्चित तौर से जमानत मिलनी चाहिए.

जामिया के भीतर फ्री कश्मीर नारे लगाने का आरोप

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान Free Kashmir और Death to ABVP जैसे नारे लगाए गए.

ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है.

ABVP का आरोप है कि आंदोलन के दौरान लगाए गए इन नारों और कथित देशविरोधी लेखन की जांच होनी चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके.

संगठन ने कहा है कि छात्रसंघ की बहाली की मांग लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जानी चाहिए और किसी छात्र संगठन के खिलाफ नफरत फैलाने वाले नारों को सही नहीं ठहराया जा सकता.

Delhi: Heavy police deployed outside Jamia Millia Islamia campus following reports of Free Kashmir slogans being written inside the campus.

Police are deployed as a precautionary measure amid tensions https://t.co/XKLk0zMS0k

IANS (@ians_india) October 23, 2026

छात्रों के प्रदर्शन पर हाई लेवल कमेटी का जवाब</stro

📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने परिसर में 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारे लिखे, जिसे विरोध के रूप में देखा गया। इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने समर्थन के लिए कदम बढ़ाया, लेकिन उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह घटना भारत के संवैधानिक ढांचे के भीतर राष्ट्रीय एकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच तनाव को उजागर करती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि राजनीतिक दलों और छात्रों के बीच विभेद कैसे तेज हो सकते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि रा

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